दिल्ली हाईकोर्ट ने UAPA मामले में पीएफआई के पूर्व प्रमुख ई अबूबकर को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया. अबूबकर को 2022 में पीएफआई पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई के दौरान एनआईए ने गिरफ्तार किया था. एनआईए के मुताबिक पीएफआई, उसके पदाधिकारियों और सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने की आपराधिक साजिश रची और इस उद्देश्य के लिए अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाए.
जेल में बंद अबुबकर ने ट्रायल कोर्ट द्वारा राहत से इनकार करने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उसने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए ट्रायल कोर्ट का रुख किया था. अबुबकर ने योग्यता और चिकित्सा दोनों आधारों पर अपनी रिहाई की मांग की थी. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, "हम अपील को खारिज करते हैं."
बता दें कि सितंबर 2022 में संगठन पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध से पहले बड़े पैमाने पर छापेमारी के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में कथित पीएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया. एनआईए के नेतृत्व में एक बहु-एजेंसी ऑपरेशन के हिस्से के रूप में देश भर में लगभग एक साथ छापे में, देश में आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने के आरोप में 11 राज्यों में बड़ी संख्या में पीएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया. अबूबकर को 22 सितंबर, 2022 को गिरफ्तार किया गया था.
गिरफ्तारियां केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, दिल्ली और राजस्थान सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गईं. सरकार ने 28 सितंबर, 2022 को पीएफआई और उसके कई सहयोगी संगठनों पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कड़े आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था.
फरवरी में, हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के चिकित्सा अधीक्षक को नियमित आधार पर अबूबकर के लिए प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने अबूबकर को घर में नजरबंद करने से भी इनकार कर दिया था और कहा था कि जरूरत पड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा.
(पीटीआई के इनपुट के साथ)