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ड्रोन फेडरेशन इंडिया के खिलाफ जालसाजी घोटाले के आरोपों की जांच CBI से कराने की गुहार

29 जनवरी 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. इसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से DFI द्वारा सरकारी दस्तावेजों की कथित जालसाजी की जांच करने की मांग की गई, जिसके बाद अब जांच के आदेश दिए गए.

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CBI (File Photo)
CBI (File Photo)

दिल्ली हाईकोर्ट में ड्रोन फेडरेशन इंडिया के खिलाफ जालसाजी घोटाले के आरोपों की जांच CBI से कराने की गुहार लगाई गई है. इस अर्जी के बाद ड्रोन फेडरेशन इंडिया (DFI) गंभीर जांच के दायरे में आ सकती है. हाल ही में सामने आए सबूतों के मुताबिक इस संगठन ने नियामक मंजूरी प्राप्त करने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों में जालसाजी की है.

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सूत्रों के मुताबिक 29 जनवरी 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. इसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से DFI द्वारा सरकारी दस्तावेजों की कथित जालसाजी की जांच करने की मांग की गई. 

RTI कार्यकर्ता तेज प्रताप सिंह द्वारा दायर इस PIL में आरोप लगाया गया है कि DFI ने एक फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तैयार की, ताकि कानूनी बाधाओं को पार कर संगठन का नाम ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के रूप में पुनः ब्रांडिंग की जा सके. यह जाली दस्तावेज कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को दिया गया है. इससे जनता को यह विश्वास दिलाया गया कि इस संगठन को सरकार की आधिकारिक मान्यता प्राप्त है.

DFI पर लगे अन्य गंभीर आरोपों में जालसाजी के अलावा, DFI पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने कुछ सदस्य कंपनियों के पक्ष में निविदाओं (टेंडर्स) को प्रभावित करने के लिए लॉबिंग तकनीकों का उपयोग किया, जिससे UAV (ड्रोन) सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को दबाया गया. इसके अलावा DFI के पूर्व एयर इंडिया बिल्डिंग में कार्यालय लेने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें कथित रूप से संदिग्ध सिफारिशों के माध्यम से यह स्थान हासिल किया गया.

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हालांकि, MCA ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. आलोचकों का मानना है कि DFI की नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MOCA) में मजबूत पहुंच के कारण जांच में देरी हो रही है. PIL में तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए CBI जांच सुनिश्चित करने की अपील की गई है ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.

DFI के निदेशक मंडल सहित इसके नेतृत्व पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत धारा 61, 316, 336, 337, 338 और 340 के तहत गंभीर आपराधिक जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं. ये सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में आते हैं. DFI के अधिकारियों ने इन आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

उद्योग और जनता की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं. जबकि UAV उद्योग इस विवाद के समाधान का इंतजार कर रहा है. आम जनता को उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस मामले में विस्तृत जांच का आदेश देगा. कार्यकर्ता तेज प्रताप सिंह का दावा है कि उन्होंने CBI और MCA को इस मामले से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली.

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