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राजनीतिक पार्टियों को कैसे चुनाव चिह्न आवंटित करता है ECI? क्या हैं नियम और पेच... जानिए

शिवसेना पर कब्जे की जंग के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का किसी भी गुट की ओर से इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगा दी है. चुनाव आयोग किस तरह से राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न आवंटित करता है और इससे जुड़े पेंच क्या हैं? क्या कहता है चुनाव आयोग को चुनाव चिह्न आवंटित करने का अधिकार देने वाला नियम?

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चुनाव आयोग आवंटित करता है सिंबल (फाइल फोटो)
चुनाव आयोग आवंटित करता है सिंबल (फाइल फोटो)

शिवसेना में बगावत के बाद उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच पार्टी पर कब्जे की जंग छिड़ी है. शिवसेना पर कब्जे की जंग छिड़ी तो विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच गया. चुनाव आयोग ने दोनों में से किसी भी गुट की ओर से शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगा दी है और दोनों ही खेमों से तीन-तीन नाम का प्रस्ताव देने के लिए कहा है जिसमें से कोई एक नाम आवंटित किया जाएगा. चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद इससे संबंधित नियमों, प्रक्रिया और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने की कहानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

किसी भी दल को चुनाव चिह्न का आवंटन चुनाव आयोग की ओर से किया जाता है. चुनाव चिह्न आवंटित करने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. निर्वाचन आयोग ने फ्री चिह्न की सूची बना रखी है जिसमें समय-समय पर बदलाव, संशोधन और नई-नई चीजें जुड़ती रहती हैं. The Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 चुनाव आयोग को क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को चुनाव चिह्न आवंटित करने का अधिकार देता है.

चुनाव आयोग के पास इस ऑर्डर के तहत सौ से सवा सौ फ्री सिंबल रहते हैं. ये किसी भी पार्टी को अलॉट नहीं किए गए होते. इन सिंबल्स में से ही किसी भी नए दल या फिर निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव चिह्न आवंटित किया जाता है. हालांकि, कोई भी दल अगर अपने चुनाव चिह्न के लिए खुद आयोग को सुझाव देता है और अगर वो किसी भी पार्टी को चुनाव चिह्न के रूप में आवंटित नहीं है तो वो सिंबल भी उस पार्टी को अलॉट किया जा सकता है.

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निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), सीपीआई और सीपीएम जैसे राष्ट्रीय दलों को जो चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं, वे रिजर्व श्रेणी में आते हैं. देशभर में उन चुनाव चिह्नों पर संबंधित पार्टी का ही एकाधिकार रहता है.

किसी राज्य में पंजीकृत क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवार उसी राज्य में पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर वह क्षेत्रीय पार्टी किसी दूसरे राज्य में अपने उम्मीदवार उतारती है और उस राज्य में वही चुनाव चिह्न किसी दल को आवंटित किया गया हो तो इसके लिए अलग प्रावधान हैं.

नियमों के मुताबिक जो पार्टी जिस राज्य के स्थानीय दल के रूप में रजिस्टर्ड है, वह किसी ऐसे राज्य में अपने उम्मीदवार उतारती है जहां उसका चुनाव चिह्न किसी और पार्टी को आवंटित हो तो उसके उम्मीदवारों को दूसरा चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा. यानी किसी एक राज्य की रीजनल पार्टी का सिंबल दूसरे राज्य में किसी दूसरी पार्टी को आवंटित किया जा सकता है. वैसे ही, जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना और झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा को एक ही चुनाव चिह्न तीर-धनुष आवंटित है.

आवंटित किए जाते हैं निर्जीव वस्तुओं के चुनाव चिह्न

चुनाव आयोग (ECI) ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स के विरोध के बाद पशु-पक्षियों की फोटो वाला चुनाव चिह्न देना बंद कर दिया है. चुनाव आयोग की ओर से ये कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पहले पार्टियां अपनी रैलियों में उस पशु की परेड कराने लग जाती थीं जिसका सिंबल उसे आवंटित होता था. बेजुबान पशु की परेड को क्रूरता बताते हुए एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने इसका विरोध किया था.

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