केरल उच्च न्यायालय ने उस नाबालिग लड़की को गर्भपात की अनुमति दे दी है जिसे उसके ही भाई ने गर्भवती किया था. कोर्ट ने नाबालिग को अपने 7 महीने के गर्भ गिराने की इजाजत दे दी है. नाबालिग के पिता द्वारा दायर याचिका में गर्भपात की मांग की गई थी और कहा गया था कि इससे नाबालिग लड़की को गंभीर मानसिक चोट पहुंचेगी. न्यायमूर्ति जियाद रहमान की एकल पीठ ने मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय दिया.
1. चिकत्सकीय गर्भपात के लिए बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है.
2. गर्भावस्था जारी रखने से बच्चे के सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है.
3. किशोर अवस्था में गर्भावस्था की जटिलता की वजह से बच्चे का शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना है.
4. जैसा कि उसने गर्भावस्था के 32 सप्ताह पार कर लिए हैं, प्री मैच्योर डिलीवरी की सभी समस्याओं के साथ एक जीवित बच्चे को जन्म देने की संभावना है. इसलिए मेडिकल बोर्ड ने जरूरत पड़ने पर शिशु और उसकी देखभाल को लेकर चिंता जताई है.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर गौर किया और कहा, 'इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, कि बच्चा अपने ही भाई-बहन से पैदा हुआ है, विभिन्न सामाजिक और चिकित्सीय जटिलताएं उत्पन्न होने की संभावना है. ऐसी परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता द्वारा गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए मांगी गई अनुमति जरूरी है. हालांकि इस संबंध में उचित आदेश जारी करने और पारित करने के बाद, एक जीवित बच्चे को जन्म देने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है, जैसा कि मेडिकल बोर्ड ने उजागर किया है.'
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