कोर्ट से सजा पाए माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी फर्जीवाड़ा करने और संपत्ति हथियाने के मामले में अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. सुप्रीम कोर्ट में फरार उमर की अर्जी पर सोमवार को सुनवाई होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट से 14 अप्रैल को निराशा हाथ लगने के बाद उमर अंसारी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है.
संपत्ति हड़पने से जुड़े मामले में माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की अग्रिम जमानत अर्जी पर सोमवार 1 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट उमर अंसारी को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर चुका है. उमर अंसारी फिलहाल फरार है. हेट स्पीच के मामले में उमर अंसारी के खिलाफ गाजीपुर की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी हुआ है.
दरअसल, इस मामले में राजस्व अधिकारी सुरजन लाल ने 27 अगस्त 2020 को लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. उसमें मुख्तार अंसारी के बेटे उमर और अब्बास पर आरोप हैं कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज बनाकर खाली संपत्ति हथिया ली थी.
इसके बाद साजिश कर लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए से उस जमीन पर इमारत बनवाने के लिए नक्शा पास करवा लिया था. अवैध रूप से जमीन कब्जा कर और नक्शा पास करवाने के बाद अवैध तरीके से इमारत भी बनवा ली.
शत्रु संपत्ति घोषित कर दी गई थी जमीन
भूमि राजस्व रिकॉर्ड में जियामऊ स्थित ये जमीन पहले मोहम्मद वसीम के नाम से दर्ज थी. वसीम बाद में पाकिस्तान चला गया तो इसे शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया. फर्जीवाड़े के जरिए इस जमीन को बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के लक्ष्मी नारायण के नाम से दर्ज करा दिया गया.
इसके बाद यही जमीन कृष्ण कुमार के नाम से दर्ज हो गई. इसके बाद उमर अंसारी और अब्बास अंसारी सीन में आए. इन दोनों भाइयों ने साजिश कर ये भूखंड हड़प लिया. बाद में उन्होंने इसे अपने नाम करा लिया.
हाईकोर्ट में सरकारी वकील ने दी थी ये दलील
हाईकोर्ट में सरकारी वकील की दलील थी कि मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी और अब्बास अंसारी ने फर्जी तरीके से अपनी दादी के हस्ताक्षर करवाए थे. लिहाजा उनके खिलाफ ये फोर्जरी का मामला बनता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने संपत्ति हड़पने के मामले में उमर और अब्बास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.
पीठ ने खारिज कर दी याचिका
पीठ ने मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें इसी मामले में आरोप पत्र को रद्द करने का अनुरोध किया गया था. जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने अंसारी परिवार द्वारा स्वतंत्र रूप से दायर दो याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया.
अंसारी परिवार की ओर से यह दलील दी गई थी कि जिस संपत्ति को हड़पने का आरोप उन पर लगा है, वो उनके जन्म से पहले उनके पूर्वजों के नाम हस्तांतरित हो चुकी थी. संपत्ति के कागजों पर उनके पूर्वजों का नाम था. इसलिए उनके खिलाफ इस मामले में कोई अपराध नहीं बनता है.