मुंबई की एस्प्लेनेड मजिस्ट्रेट कोर्ट ने महिला का पीछा करने, उसे घूरने के आरोपी 40 वर्षीय गैराज मालिक को बरी कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने कहा- महिला की इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि कोई मुंबई की बिजी रोड पर उसका पीछा करता है. ऐसा लगता है कि महिला ने शख्स को गलत समझ लिया है.
महिला का आरोप है कि वह हर दिन सुबह 8:30 बजे मरीन लाइन रेलवे स्टेशन से ट्रेन को पकड़ने के लिए घर से निकलती है. उसने बताया कि 2017 में जब वह ऑफिस के लिए घर से निकलती थी तब आरोपी हर दिन उसका पीछा करता था. वह पैदल फुटपाथ से जाती थी तब आरोपी धीरे-धीरे बाइक चलाकर उसका पीछा करता था. उसने बताया कि वह इस दौरान उसे घूरता भी था. वह बहुत असहज महसूस करती थी. ऐसा आरोपी ने तीन महीने तक किया.
महिला ने बताया कि 2017 में 3 अगस्त को जब वह ब्रिज पर पहुंची तो पहले तो आरोपी ने उसे बहुत गुस्से से देखा. बाद में उसकी तरफ हाथ हिलाने लगा, जिससे वह डर गई थी. जब उसने ऐसी हरकत की तब ब्रिज पर कोई नहीं था. उसने इस बारे में अपने दोस्तों को बताया. उन्होंने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी तो उसने केस दर्ज कराया और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
हालांकि सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट यशश्री मारुलकर ने तर्क दिया- “मुंबई की व्यस्त सड़कों पर, सुबह के समय, जब लोग रेलवे स्टेशन या अपने ऑफिस जा रहे होते हैं, तब ऐसी हरकत करना समझ से परे है. कोर्ट ने कहा कि सुबह ऑफिस आवर में फुटपाथ पर चलने वाले का सड़क की दूसरी तरफ से पीछा करना बेहद असंभव है, इसलिए महिला की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता.
मजिस्ट्रेट ने आगे कहा, "अगर आरोपी तीन महीने तक लगातार महिला का पीछा कर रहा था तो सवाल उठता है कि उसने तुरंत पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया और उसने इतने लंबे समय तक इंतजार क्यों किया?”
कोर्ट ने आरोपी की उस बात को तर्कपूर्ण माना कि उसका गैराज उस गली में सबसे आखिर में है, जहां महिला रहती है. महिला की गलतफहमी का शिकार हो गई कि वह उसका पीछा कर रहता है.