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ओडिशा हाईकोर्ट ने 2016 के ट्रिपल मर्डर केस में 9 दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला, जानें वजह

ओडिशा हाईकोर्ट ने 2016 के एक ट्रिपल मर्डर केस में नौ दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. यह हत्याएं जादू-टोना करने के शक में की गई थीं. कोर्ट ने दोषियों को पूरी उम्र जेल में रहने की सजा सुनाई और पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया.

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(प्रतीकात्मक फोटो)
(प्रतीकात्मक फोटो)

ओडिशा हाईकोर्ट ने बुधवार को 2016 के ट्रिपल मर्डर केस में नौ दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. यह मामला ओडिशा के रायगड़ा जिले के किटुम गांव का है, जहां 2016 में जादू-टोना करने के शक में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी.

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रायगड़ा जिला कोर्ट ने 2021 में इन नौ लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच, जिसमें जस्टिस एसके साहू और आरके पटनायक शामिल थे. उन्होंने कहा कि इस मामले में मौत की सजा उचित नहीं है और उम्रकैद की सजा अधिक उपयुक्त होगी.

फांसी की सजा को कोर्ट ने उम्रकैद में बदला 

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलते हैं. तीनों हत्याओं के लिए दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है और ये सजा साथ-साथ चलेगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताएंगे और उन्हें कोई रियायत या माफी नहीं मिलेगी.

हत्या के शिकार लोगों में असिना साबर, उनकी पत्नी अंबई और उनकी बड़ी बेटी असिमानी शामिल थीं. परिवार की छोटी बेटी मेलिता और दो छोटे भाई किसी तरह भागने में सफल रहे. घटना के समय मेलिता सिर्फ 10 साल की थी.

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पूरी जिंदगी जेल में बिताएंगे सभी आरोपी

हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार को आदेश दिया कि वह ओडिशा विक्टिम कंपेंसेशन (अमेंडमेंट) स्कीम-2018 के तहत पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा दे. यह मुआवजा मेलिता और उसके दो भाइयों के बीच बराबर बांटा जाएगा. सरकार को यह मुआवजा चार हफ्तों के भीतर देना होगा.

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