ज्ञानवापी विवाद से जुड़ी 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट' मामले की सुनवाई अब जनवरी में होगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को 12 दिसंबर तक का समय दिया है. जवाब दाखिल होने के बाद जनवरी में इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है. बता दें इस एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल गई गई थीं. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस एस रविंन्द्र भट्ट की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है.
द प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट 1991 की धारा 3 कहती है कि धार्मिक स्थलों को उसी रूप में संरक्षित किया जाएगा, जिसमें वह 15 अगस्त 1947 को था. अगर ये सिद्ध भी होता है कि मौजूदा धार्मिक स्थल को इतिहास में किसी दूसरे धार्मिक स्थल को तोड़कर बनाया गया था, तो भी उसके अभी के वर्तमान स्वरूप को बदला नहीं जा सकता. इससे छूट के लिए सिर्फ पुरातात्विक अवशेष और एएसआई की देखरेख वाली इमारतों या स्मारकों को रखा गया है.
राम मंदिर विवाद को रखा गया अलग
हालांकि इस एक्ट के तहत विशिष्ट तौर पर सिर्फ राम मंदिर विवाद मामले को अलग रखा गया था. दरअसल, अयोध्या का मामला उस समय हाई कोर्ट में था इसलिए उसे इस क़ानून से अलग रखा गया था.1991 में केंद्र सरकार जब ये क़ानून लाई तब भी संसद में इसका विरोध हुआ था और इस मामले को संसदीय समिति के पास भेजने की मांग उठाई गई थी. हालांकि ये एक्ट पास होकर लागू हो चुका था. इसके बाद नवंबर 2019 में राम मंदिर विवाद ख़त्म होने के बाद काशी और मथुरा सहित देशभर के लगभग 100 मंदिरों की जमीनों को लेकर दावेदारी की बात उठने लगी. लेकिन Places of Worship Act के कारण... दावेदारी करने वाले लोग... अदालत का रास्ता नहीं चुन सकते, इससे ये विवाद और बढ़ता चला गया.
ज्ञानवापी, मथुरा, ताजमहल और कुतुब मीनार को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के खिलाफ (Places of Worship Act 1991) एक और याचिका दाखिल की गई. इस याचिका में कहा गया है कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों का खुलकर उल्लंघन करता है. साथ ही यह नागरिक अधिकारों को लेकर भी अवैध है. यह याचिका स्वामी जितेन्द्रनाथ सरस्वती की ओर से दाखिल की गई.
वहीं पिछले साल अगस्त में 5 महिलाओं ने वाराणसी सिविल कोर्ट में याचिका दायर की. इसमें मांग की कि मां श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश और भगवान हनुमान की रोजाना पूजा करने की अनुमति दी जाए. याचिका में कहा गया कि विवादित जगह पर 1993 तक मां श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश और भगवान हनुमान की रोजाना पूजा हो रही थी. 1993 के बाद साल में सिर्फ एक बार ही पूजा करने की अनुमति दी गई. अब चूंकि, 15 अगस्त 1947 के बाद भी यहां पर रोजाना पूजा होती आ रही थी, इसलिए 1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट यहां लागू नहीं होता. कोर्ट ने इस दलील को मान लिया.