शिवलिंग पर बिच्छू वाले बयान पर मानहानि के मामले में शशि थरूर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने थरूर के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी. पीठ ने दिल्ली स्टेट और शिकायतकर्ता और बीजेपी नेता राजीव बब्बर को नोटिस भेजकर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है.
थरूर के वकील मोहम्मद अली खान ने बचाव में तीन बिंदुओं पर अपनी बात रखते हुए दलील देना शुरू की तो कोर्ट ने कहा कि आप तो सीधे शुरू हो गए. पहले अपना परिचय तो दीजिए. इसके बाद थरूर के वकील ने इस पूरी घटना का बैकग्राउंड बताया फिर बेंगलुरु लिट फेस्ट में अपनी किताब के लोकार्पण पर दिए अपने स्पीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना शिवलिंग से लिपटे बिच्छू से करने की बात बताई. उन्होंने कहा था कि इसे न हाथ से हटा सकते हैं न जूते से मार सकते हैं.
थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने दायर किया था. थरूर के वकील ने कहा कि लिट फेस्ट में अपनी किताब रिलीज करते हुए उन्होंने बस एक टिप्पणी की थी, जिसमें प्रधानमंत्री का नाम भी नहीं लिया गया था. वो तो अलंकारिक भाषा मे एक कहावत का हवाला दिया था कि शिवलिंग पर बिच्छू बैठा है. न उसे हाथ से हटा सकते हैं ना जूते से मार सकते हैं. दरअसल थरूर अंग्रेजी की एक कहावत के जरिए ऐसी स्थिति का हवाला दे रहे थे कि न जी पा रहे हैं न मर पा रहे हैं.
जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने कहा कि वो तो साहित्यिक समारोह में दिया गया भाषण था, जिसमें कहावत पर किसी को क्या और क्यों आपत्ति हो सकती है? थरूर के वकील ने कहा कि जब 2012 में शशि थरूर का ये बयान एक पत्रिका में छपा तब तो किसी ने आपत्ति नहीं की. लेकिन वही बात 2018 में जब एक हवाले से कही गई तो कुछ लोगों को आपत्ति हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने थरूर के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी और निचली अदालत में याचिकाकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने चार हफ्ते में नोटिस का जवाब मांगा है.