गुजरात के बिलकिस बानो केस के दोषियों ने सरकारी सजा रद्द होने के 8 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और सरेंडर करने के लिए समय दिए जाने की मांग की है. SC ने 8 जनवरी को अपने फैसले में सभी 11 दोषियों को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया था. अब इस केस के 5 दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग अर्जियां दाखिल की हैं और 6 हफ्ते का समय बढ़ाए जाने की मांग की है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिलकिस बानो केस के दोषियों के सरेंडर करने का समय नजदीक आ गया है. ऐसे में इस केस के दोषी अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मोहलत दिए जाने की मांग करने लगे हैं. कुल 11 दोषियों में 5 की तरफ से याचिकाएं दायर की गई हैं. इन अर्जियों में अलग-अलग वजह से मोहलत मांगी जा रही है.
'घरेलू और पारिवारिक समस्याओं का दिया हवाला'
पहले गोविंद भाई नाई सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. उसके बाद रमेश रूपा भाई चंदना और मितेश चिमन लाल भट्ट ने अर्जियां लगाई हैं. अब प्रदीप रमण लाल मोडिया और विपिन चंद्र कन्हैया लाल जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इन लोगों ने सेहत, घरेलू और पारिवारिक परिस्थितियां और निजी कारणों से आत्मसमर्पण की समय-सीमा बढ़ाने की गुहार लगाई है. दोषियों के वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की अर्जी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है.
'सरेंडर करने के लिए समय बढ़ाए जाने की मांग'
दोषी रमेश रूपाभाई चंदना और मितेश चिमनलाल भट ने दो हफ्ते में जेल में सरेंडर करने की तारीख को 6 हफ्ते और बढ़ाने की मांग की है. चंदन ने अपनी अर्जी में बेटे की शादी का हवाला दिया है तो भट ने फसल की सीजन का हवाला देते हुए सरेंडर करने के लिए 6 हफ्ते दिए जाने की मांग की है. गोविंदभाई नाई ने सरेंडर के लिए दो की बजाय चार हफ्ते की मोहलत दिए जाने की गुहार लगाई है. दो दोषियों ने अपनी बढ़ती उम्र और खराब सेहत का भी हवाला दिया.
याचिका में गोविंदभाई ने कहा, वो अपने 88 वर्षीय पिता और 75 वर्षीय मां की देखभाल कर रहे हैं. घर में माता-पिता की एकमात्र देखभाल करने वाले सदस्य हैं. मितेश चिमनलाल भट ने कहा कि उनकी सर्दियों की फसल कटाई के लिए तैयार है और वो इसे पूरा करना पसंद करेंगे.
क्या है मामला
अगस्त 2022 में गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में उम्रकैद की सजा पाए सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया था. दोषियों की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में बिलकिस और अन्य संगठनों ने चुनौती दी थी. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने 8 जनवरी को फैसला सुनाते हुए कहा कि 11 दोषियों की जल्द रिहाई को चुनौती देने वाली बिलकिस बानो की याचिका वैध है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि दोनों राज्यों (महाराष्ट्र-गुजरात) के लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट फैसले ले चुके हैं. ऐसे में कोई आवश्यकता नहीं लगती है कि इसमें किसी तरह का दखल दिया जाए. अब दो हफ्ते के अंदर दोषियों को सरेंडर करना होगा.