दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा में रोल को लेकर फेसबुक को जो दिल्ली विधानसभा की समिति द्वारा नोटिस भेजा गया था, उसपर बीते दिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म अब एक पावर सेंटर बन गए हैं, जिनके पास लोगों को प्रभावित करने की ताकत है.
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म को जवाबदेह होना होगा. अदालत ने इस दौरान फेसबुक की उस कमेंट पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उसने कहा कि वह एक सिर्फ पोस्टिंग प्लेटफॉर्म है, जो थर्ड पार्टी की जानकारी को साझा करता है.
बता दें कि फेसबुक को दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सौहार्द कमेटी द्वारा समन भेजा गया था, इसी के खिलाफ फेसबुक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि फेसबुक के अधिकारियों को कमेटी के सामने पेश होना होगा, हालांकि कमेटी कोई एक्शन नहीं ले सकती है.
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि पिछले साल जैसी हिंसा हुई दिल्ली ऐसा फिर बर्दाश्त नहीं कर सकती है, ऐसे में भारत की अनेकता में एकता की ताकत को खराब नहीं किया जा सकता है. और फेसबुक का रोल क्या है, वह देखना ज़रूरी है.
बता दें कि बीते साल दिल्ली में हुई हिंसा में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस दौरान फेसबुक पर जमकर वीडियो और कंटेंट वायरल हुए थे, जिसको लेकर दिल्ली विधानसभा की समिति ने फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अजित मोहन को समन भेजा था.
इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को करीब 188 पेज का फैसला सुनाया. जिसमें कहा गया कि अगर समिति अपनी क्षमताओं से कोई एक्शन लेती है या फिर उससे बाहर का सवाल पूछती है तो फेसबुक के पास अधिकार रहेगा कि वह उसका जवाब ना दे.
(इनपुट: पीटीआई )