सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई के कोयम्बेडु में स्थित एक मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने के आदेश को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमें मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है.
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मस्जिद-ए-हादिया और मदरसा को गिराने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता हादिया मुस्लिम वेलफेयर इस जमीन का मालिकाना हक नहीं रखता है. कोर्ट ने कहा कि हादिया मुस्लिम वेलफेयर का इस जमीन पर कब्जा है. कोर्ट ने इसे गैरकानूनी करार दिया.
यह जमीन चेन्नई मेट्रोपोलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी की है. उस जमीन पर याचिकाकर्ता ने अवैध निर्माण कर रखा था. यहां तक कि निर्माण कार्य के लिए जो मंजूरी लेनी थी उसके लिए आवेदन तक नहीं किया गया था. यहां तक कि निर्माण कार्य के खिलाफ दिसंबर 2020 में CMDA के द्वारा नोटिस भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण को जारी रखा गया था.
इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने कोयम्बेडु में स्थित मस्जिद-ए-हादिया और मदरसे को गिरने का आदेश दिया था. मद्रास हाई कोर्ट ने मस्जिद-ए-हादिया और मदरसा को गिरने का आदेश पिछले साल नवंबर में दिया था. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह निर्माण पूरी तरीके से अवैध रूप से बनाई गई है.
दरअसल, चेन्नई के कोयम्बेडु में स्थित मस्जिद-ए-हादिया और मदरसा को गिरने का आदेश देते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने बीते साल नवंबर में संरचना को अवैध बताया था. मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को मस्जिद-ए-हादिया वेलफेयर और अन्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्माण कार्य को अवैध बता दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि उसे मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है.