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Rapido को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में सर्विस पर लगाई थी रोक

बाइक टैक्सी कंपनी रैपिडो की सर्विस पर महाराष्ट्र में लगी रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया है. बता दें कि रैपिडो ने महाराष्ट्र में बॉम्बे हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने रैपिडो को अपनी सेवा इसलिए बंद करने के लिए कहा था क्योंकि उसके पास जरूरी लाइसेंस नहीं है.

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सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी कंपनी रैपिडो के संचालन पर रोक लगाए जाने के हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि एग्रीगेटर्स के निजी वाहनों को पूल करने के मामले पर वह 31 मार्च तक फैसला ले. CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह बात तब कही जब महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स के लिए सरकार एक नई स्कीम पर विचार कर रही है. 

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दरअसल, रैपिडो ने महाराष्ट्र में उसकी सेवा बंद करने के बॉम्बे हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने रैपिडो को अपनी सेवा इसलिए बंद करने के लिए कहा था क्योंकि उसके पास जरूरी लाइसेंस नहीं है. रैपिडो ने अपनी याचिका में कहा था कि परिचालन बंद होने से उसके हजारों कर्मचारी प्रभावित होंगे.

13 जनवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर रैपिडो को महाराष्ट्र सरकार से लाइसेंस लिए बिना संचालन करने के लिए फटकार लगाई थी. अदालत ने सेवाओं को तुरंत बंद करने के निर्देश भी दिए थे. इसके बाद रैपिडो ने महाराष्ट्र में संचालन बंद कर दिया था. इसके बाद ही कंपनी ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सरकारी आदेश में कहा गया है कि परिवहन वाहनों (वाणिज्यिक वाहनों) के रूप में गैर-परिवहन गाड़ियों का उपयोग काफी बढ़ा है. इसके चलते यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं और उन्हें खतरा भी पैदा हो गया है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल डॉ. बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया था कि बाइक टैक्सी को राज्य में चलाने की मंजूरी नहीं है, क्योंकि इसके लिए राज्य में कोई नीति या गाइडलाइंस नहीं है. उन्होंने कहा था कि फैसला लंबित होने तक रैपिडो को राज्य में बाइक टैक्सी नहीं चलानी चाहिए. इस पर जस्टिस जीएस पटेल और जस्टिस एसजी डिगे की पीठ ने सहमति जताई थी कि पॉलिसी सभी एग्रीगेटर्स के लिए समान होनी चाहिए. या तो सभी को मंजूरी दी जाएगी वरना नहीं दी जाएगी.

सुनवाई के दौरान सराफ ने उन एग्रीगेटर्स की सूची पेश की थी, जिनकी याचिकाएं लाइसेंस के लिए लंबित हैं. उन्होंने कहा था कि रैपिडो बिना किसी लाइसेंस के टैक्सी और ऑटो रिक्शा चला रहा है. इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने रैपिडो को फटकार लगाते हुए उसे अपने सेवाएं लाइसेंस मिलने तक सस्पेंड करने का निर्देश दिया था. रैपिडो ने कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य में अपनी सेवाएं बंद करने को लेकर सहमति दे दी थी.

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