
अगर शराब पीने का आखिरी मकसद सिर्फ नशा करना है तो दुनिया भर में इसे इतने अलग-अलग किस्म के पैमानों में क्यों परोसा जाता है? वाइन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी शराब को परोसने के लिए बेस्ट व्हिस्की गिलास वही हैं, जो उसके रंग और सुगंध का एहसास करने में मदद करे और शराब के स्वाभाविक प्रकृति में कोई बदलाव न करे. कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि अगर गलत गिलास का चुनाव किया तो बेहद महंगी शानदार क्वॉलिटी की व्हिस्की का मजा भी किरकिरा हो सकता है. तो आइए, समझते हैं कि बाजार में इतनी तरह के व्हिस्की गिलास क्यों मौजूद हैं और इनका आखिर क्या इस्तेमाल है.
रॉक्स गिलास: व्हिस्की प्रेमियों के बीच यह सबसे ज्यादा मशहूर है. इसे ओल्ड फैशंड गिलास या टंबलर गिलास भी कहते हैं. बार-पब में भी ये सबसे ज्यादा नजर आते हैं. इन गिलास की तली काफी मोटी और भारी होती है. भारी तली का मकसद व्हिस्की की स्वाभाविक गर्माहट को बरकरार रखना है ताकि जिस सतह पर गिलास को रखा जाए, उसका तापमान परोसी गई शराब के तापमान को प्रभावित न करे. दरअसल, जानकार कहते हैं कि तापमान बदलते ही व्हिस्की का स्वाद भी बदल जाता है. हालांकि, भारत और कुछ एशियाई देशों में बर्फ और पानी आदि डालकर शराब पीने का चलन है. कहते हैं कि रॉक्स गिलास का साइज बड़े-बड़े बर्फ के टुकड़े डालकर 'ऑन द रॉक्स' जैसी ड्रिंक्स पीने के लिए बिलकुल मुफीद है. वहीं, निचला हिस्सा मजबूत होने की वजह से यह कॉकटेल बनाते वक्त 'मडलिंग' आदि की प्रक्रिया के लिए भी बेहतर चॉइस हैं.
हाईबॉल गिलास: इसे टंबलर गिलास का ही लंबा स्वरूप समझा जा सकता है. टंबलर की तरह ही इसकी पेंदी मोटी होती है. हालांकि, टंबलर की तुलना में यह गिलास काफी लंबा होता है. भारत समेत पूरी दुनिया में व्हिस्की का जो कॉकटेल सबसे मशहूर है, उसे हाईबॉल कहते हैं. इसमें व्हिस्की को सोडा और पानी के साथ परोसा जाता है. हाईबॉल गिलास को यह नाम इसी कॉकटेल से मिला है. मोटी पेंदी की वजह से इतने लंबे गिलास का संतुलन बना रहता है. लंबे साइज की वजह से इसका इस्तेमाल कई तरह के कॉकटेल्स परोसने के लिए किया जाता है.
ग्लेनकेर्न गिलास: इस तरह के गिलास का इस्तेमाल फूड रिव्यूवर या डिस्टिलरी के वाइन टेस्टर करते हैं. व्हिस्की के रंग, गाढ़ापन और स्वाद को समझने के लिए इससे बेहतर गिलास नहीं हो सकता. वाइन टेस्टर इस गिलास में शराब को डालकर पहले गोल-गोलकर घुमाकर इसके गाढ़ेपन और रंग को समझते हैं, फिर नाक के बगल से कई बार गुजारकर इसकी गंध को महसूस करते हैं. इसलिए इसे नोजिंग गिलास (Nosing) भी कहते हैं. इस गिलास का ऊपरी हिस्सा जरा पतला, बीच में चौड़ा और निचला हिस्सा फिर पतला होता है. इसके अलावा, इसमें एक छोटा और ठोस बेस भी अलग से नजर आता है. इस तरह के गिलास वे पसंद करते हैं, जिन्हें गिलास के नीचे पतले स्टेम अच्छे नहीं लगते. गिलास का शेप कुछ ऐसा होता है जो व्हिस्की की गंध को ऊपर की ओर उठने में मदद करता है. इस तरह के गिलास में पीने से पहले शराब प्रेमी व्हिस्की को हिलाकर पहले उसकी सुगंध का एहसास करते हैं.
कोपिता गिलास: यह यह स्पेनिश गिलास है, जिसका वहां इस्तेमाल स्थानीय शराब शेरी को पीने के लिए बहुतायत में किया जाता था. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शराब प्रेमी इस तरह के गिलास का इस्तेमाल सिंगल मॉल्ट व्हिस्की का आनंद उठाने के लिए करते हैं. अब दुनिया भर के वाइन टेस्टर और मास्टर ब्लेंडर व्हिस्की के सैंपल को जांचने के लिए भी इनका इस्तेमाल करते हैं. इन्हें ट्यूलिप गिलास भी कहते हैं. गिलास का ऊपरी हिस्सा कुछ कुछ ग्लेनकेर्न गिलास जैसा ही होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि कोपिता गिलास के निचले हिस्से को पकड़ने का स्टेम लंबा और पतला होता है. ऐसा इसलिए ताकि हाथ की गर्माहट शराब के स्वाभाविक तापमान को न बदले और उसका स्वाद न बिगड़े.
स्निफटर गिलास: इस तरह के गिलास का निचला हिस्सा काफी चौड़ा जबकि ऊपरी हिस्सा पतला होता है. इन्हें बलूंस गिलास या कॉग्नेक गिलास भी कहते हैं. व्हिस्की की असल एरोमा का एहसास करते हुए उसे धीमे-धीमे पीने के शौकीन इनका खूब इस्तेमाल करते हैं. एलीट क्लास में यह गिलास बेहद मशहूर हैं. हॉलीवुड की फिल्मों में अमीर किरदार इस तरह के गिलास में शराब पीते और सिगार फूंकते अक्सर नजर आ जाते हैं. दरअसल, गिलास का पतला मुंह उसके एरोमा को ऊपर उठने में मदद करता है. इनका इस्तेमाल ब्रांडी पीने में भी किया जाता है. इन गिलास का एक फायदा यह भी है कि शराब के छलकने का डर नहीं रहता.
नीट गिलास: माना जाता है कि इन्हें ऐसी तकनीक से तैयार किया गया है, जो शराब के तीखे गंध को नाक में सीधे जाने से रोकता है. शराब में बिना कुछ मिलाए उसे सीधे गटकने यानी नीट पीने के लिए इस तरह के गिलास का इस्तेमाल होता है. यह गिलास साइज में जरा छोटे होते हैं लेकिन इनका बेस और ऊपरी जरा भारी और चौड़ा होता है. जानकार मानते हैं कि इस तरह के गिलास में शराब पीने की आदत सभी को नहीं होती क्योंकि इनका शेप जरा अलग होता है.
नोरलन गिलास: इस तरह के गिलास दोहरी पर्त वाले होते हैं. शराब के जानकार कहते हैं कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि लोग महंगी व्हिस्की के स्वाद और गंध को उसी फॉर्म में महसूस कर सकें. गिलास के ऊपर का चौड़ा मुंह आसानी से घूंट भरने में मदद करता है. वहीं, शीशे की दोहरी पर्त की वजह से हाथ की गर्माहट शीशे को पार करके व्हिस्की के स्वाभाविक तापमान को प्रभावित नहीं करता.
(Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी देने के लिए है. इसका मकसद शराब पीने को बढ़ावा देना बिलकुल नहीं है.)