शहद के सेवन करने से कई तरह की बीमारियों में फायदा होता है. शहद को जीवाणु रोधी, एंटीफंगल के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर माना गया है. अमेरिका के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार शहद में प्रोटीन, अमीनो एसिड, विटामिन, एंजाइम, खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
आयुर्वेद की दवाओं का बेहतर फायदा शुद्ध शहद के साथ उपयोग होने से मिलता है. सर्दी, जुकाम, खांसी की समस्या में भी इसे सहायक माना जाता है. मौसमी बीमारियों से बचने के लिए शहद का उपयोग फायदेमंद है. शहद के नाम पर इन दिनों बाजार में मिलावट खूब हो रही है. ऐसे में सेहत को फायदा पहुंचाने वाली इस औषधि में मिलावट के नुकसान से बचने के लिए हमें शुद्ध शहद की पहचान होना जरूरी है.
थंब टेस्ट से पहचानें शहद की असलियत
अगर आप शहद के असली और नकली होने की पहचान करना चाहते हैं तो अपने अंगूठे पर थोड़ी मात्रा में शहद लगाएं. अगर यह आपके अंगूछे पर अन्य तरल पदार्थ की तरह फैल रहा है तो मान लें यह असली शहद नहीं है. असली शहद गाढ़ा होता है और टपकता नहीं है.
वाटर टेस्ट के जरिए भी शहद की हो सकती है पहचान
आप पानी के जरिए भी शहद के असली और नकली होने की पहचान कर सकते हैं. एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद डालें. अगर आपका शहद पानी में घुल रहा है तो वह नकली है. शुद्ध शहद की बनावट मोटी होती. यह गिलास के तल में जाकर जम जाती है.
सिरके से भी शहद की पहचान
आप सिरके के सहारे भी शहद के असली और नकली होने की पहचान कर सकते हैं. आप सिरके के पानी में शहद की कुछ बूंदें मिलाएं. अगर मिश्रण से झाग आने लगे तो आपका शहद नकली है.
हीट टेस्ट भी बताएगा शहद की असलियत
शहद जलता नहीं है यानी इसमें आग नहीं लगती. हीट टेस्ट ट्राई करने के लिए माचिस की तीली को शहद में डुबोकर जलाएं. अगर यह जलता है, तो आपका शहद मिलावटी है.