रोजाना एक सेब खाने से (Eat An Apple Day) कई बड़ी और भयंकर बीमारियां शरीर से कोसों दूर रहती हैं. कई हेल्थ एक्सपर्ट रिपोर्ट में ऐसा दावा कर चुके हैं. सेब के औषधीय गुणों को देखते हुए हर साल सितंबर के तीसरे शनिवार को 'इंटरनेशनल ईट एन एप्पल डे' भी सेलिब्रेट किया जाता है. सेब खाने के फायदे जानने के बाद आप इसे अपनी मॉर्निंग डाइट (Morning diet) में कभी शामिल करना नहीं भूलेंगे.
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एक स्टडी के मुताबिक, सेब में मौजूद फ्रक्टोज और पॉलीफेनल्स एंटी-ऑक्सीडेंट्स ना सिर्फ मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को दुरुस्त करता है, बल्कि खून में शुगर (Blood sugar) को भी बैलेंस रखता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेब मे मौजूद एंथोसियानिन एंटी-ऑक्सीडेंट्स टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है. ये आमतौर पर लाल, जामुनी और नीले रंग के फलों और सब्जियों में पाया जाता है.
साल 2007 में सामने आई 'कॉर्नेल यूनिवर्सिटी' की एक स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेब के छिलके में ट्रिटरपेनॉयड्स (triterpenoids) कंपाउंड पाए जाते हैं. ये कंपाउंड कैंसर (Cancer compounds) पैदा करने वाले सेल्स को नष्ट करने का काम करता है.
सेब में मौजूद पैक्टीन फाइबर शरीर से एक्स्ट्रा कैलोरी और फैट को भी कम करने में मददगार है. बैंगलोर न्यूट्रिशियनिस्ट डॉ. अंजू के मुताबिक, सेब खाने से आपकी भूख लंबे समय तक कंट्रोल रहती है और शरीर को डायजेशन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है. ऐसा लगातार करने से आपका वजन भी घटने (Weight loss) लगता है.
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सेब खाने से आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है. सेब में मौजूद पैक्टीन पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है. खासतौर से कब्ज और डायरिया में सेब खाना काफी फायदेमंद होता है. पैक्टीन की शरीर में जल्दी घुलने और टॉक्सिन्स को बॉडी से बाहर निकालने की खासियत सेब को ज्यादा बेहतर फल बनाती है.
सेब हमारी सेहत के अलावा हड्डियों के लिए भी बड़ा फायदेमंद है. दरअसल सेब के छिलके में फैवोनॉयड फ्लोरिजिन पाया जाता है, मेनोपॉज के दौरान हड्डियों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा करता है. ये हड्डियों को नुकसान देने वाले इनफ्लेमेशन रैडिकल प्रोडक्शन से लड़ता है.
पैक्टीन फाइबर और पॉलिफेनोल्स जैसे कई घटक शरीर में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा को घटाने में फायदेमंद बताए जाते हैं. ये खून में तेज रक्त प्रवाह को भी बैलेंस करने का काम करते हैं. इससे मांसपेशियों में कमजोरी और रक्त वाहिकाओं के डैमेज होने का खतरा भी कम होता है.