कोरोना की दूसरी लहर के साथ ही भारत में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इस लहर में कई नए लक्षण भी देखे जा रहे हैं जो इस बात का संकेत दे रहे हैं कि ये वायरस ना सिर्फ फेफड़ों बल्कि शरीर अन्य हिस्सों पर भी असर डाल रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे शरीर में कोरोना वायरस का हमला बढ़ता है, ये इम्यून सिस्टम को कमजोर करने के साथ-साथ दूसरे बॉडी पार्ट्स में सूजन पैदा कर रहा है. अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाइपरटेंशन या मोटापे की समस्या है तो फिर कोरोना का शरीर पर असर और ज्यादा होता है. ऐसे में जरूरी है कि आप कोराना से संक्रमित होने के बाद अपने सभी लक्षणों पर ध्यान दें और शरीर में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को नजरअंदाज ना करें. आइए जानते हैं कि कोरोना हमारे पूरे शरीर को किस तरह प्रभावित कर रहा है.
दिल पर असर- जिन लोगों को पहले से दिल संबंधी कोई बीमारी हो या जिनका मेटाबोलिक सिस्टम खराब हो, उन लोगों में COVID-19 होने का खतरा ज्यादा रहता है. SARs-COV-2 वायरस कोरोना मरीजों के दिल की मांसपेशियों में सूजन बढ़ा देता है.
हार्वर्ड हेल्थ पब्लिकेशन के अनुसार, 'कोरोना के लगभग एक-चौथाई मरीज जिन्हें गंभीर लक्षण के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनमें हार्ट से जुड़ीं समस्याएं भी देखी गईं. इनमें से लगभग एक तिहाई लोगों में पहले से ही कार्डिवस्कुलर डिजीज थी.' पब्लिकेशन के अनुसार, असामान्य हृदय गति, दिल का जोर-जोर से धड़कना, सीने में दर्द और थकान जैसे लक्षण अक्सर कोरोना वायरस के मरीजों में देखे जाते हैं.
न्यूरोलॉजिकल समस्या- पिछली कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, COVID-19 के मरीजों में मानसिक दुविधा, भ्रम, सिरदर्द, चक्कर आना और धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण सामने आए थे. JAMA न्यूरोलॉजी में छपी एक स्टडी के अनुसार, वुहान में अस्पताल में भर्ती 214 में से एक तिहाई कोरोना के मरीजों में न्यूरोलॉजिक लक्षण पाए गए थे जिनमें दौरे और स्ट्रोक आने जैसे गंभीर लक्षण भी थे.
इस स्टडी में ये भी दावा किया गया है कि COVID-19 का असर लंबे समय तक रह सकता है जिसकी वजह से मरीज में आगे चलकर अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं.
किडनी हो सकती है खराब- अन्य समस्याओं के अलावा कोरोना के मरीजों में किडनी की समस्या भी बढ़ती जा रही है. SARS-CoV-2 कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जिसमें वायरल स्पाइक प्रोटीन ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ जाता है. इसकी वजह से किडनी समेत कई अंगो की कोशिकाएं संक्रमित हो जाती हैं.
किडनी में पहुंचने के बाद ये वायरस गंभीर सूजन कर देता है जिसका असर किडनी के टिश्यू पर भी पड़ता है. इसकी वजह से यूरीन की मात्रा कम हो जाती है. कोरोना से ठीक होने के बाद भी किडनी ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती है.
ब्लड क्लॉट- COVID-19 शरीर में गंभीर सूजन कर देता है जिसकी वजह से कई लोगों में खून के थक्के बनने लगते हैं. इस पर अब भी स्टडी जारी है कि आखिर इसकी वजह क्या है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ACE2 रिसेप्टर्स से जुड़ने के बाद SARS-COV-2 वायरस रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है. इसकी वजह से बनने वाला प्रोटीन ब्लड क्लॉटिंग बढ़ाता है. डॉक्टरों ने कई ऐसे मामले बताए है जहां खून के थक्के ना सिर्फ फेफड़ों में बल्कि पैर की नसों और शरीर के अन्य हिस्सों में भी देखे गए हैं.
रिकवरी टाइम पर असर- COVID-19 शरीर के कई हिस्सों में सूजन पैदा कर देता है जिसकी वजह किसी-किसी को इससे ठीक होने में लंबा वक्त लग जाता है. यह वायरस न केवल फेफड़ों पर बल्कि दिल और दिमाग पर भी असर डालता है. इससे लंबे समय तक सेहत संबंधी समस्याएं रहने का खतरा बढ़ जाता है.