जब शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुंचना कम हो जाता है तो खून में ग्लूकोज का लेवल बढ़ने लगता है. मेडिकल भाषा में इसे डायबिटीज (Diabetes) कहते हैं. ये एक क्रॉनिक और मेटाबॉलिक डिसीज (Metabolic disease) है जो एक समय के बाद हृदय, रक्त कोशिकाओं, आंख, किडनी और तंत्रिकाओं को नष्ट कर देती है. WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में 42 करोड़ से ज्यादा लोग इस भयंकर बीमारी की चपेट में हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि शरीर में 7 लक्षण देखकर आप डायबिटीज के खतरे (Diabetes symptoms) की पहचान कर सकते हैं.
बहुत ज्यादा प्यास लगना टाइप-2 डायबिटीज का लक्षण है. आप कह सकते हैं कि पानी की कोई भी मात्रा ज्यादा देर तक आपकी प्यास को शांत नहीं रख पाएगी. खून में शुगर की अधिक मात्रा किडनी पर फिल्टर का अधिक दबाव बनाती है. यदि किडनी तेजी से अपना काम नहीं करेगी तो शरीर में यूरीन प्रोडक्शन बढ़ जाएगा और आपको बार-बार पेशाब आएगा. इससे डीहाइड्रेशन की समस्या भी बढ़ सकती है. यदि आपको दिनभर ज्यादा प्यास लगती है और आप बार-बार बाथरूम जाते हो तो एक बार डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
खून में शुगर लेवल बढ़ने की वजह से चोट के घाव या जख्म जल्दी ठीक नहीं होते हैं. इतना ही नहीं, शरीर पर एक छोटे से घाव का निशान भी जल्दी ठीक नहीं होता है. शेविंग करते वक्त चेहरे पर आया एक जरा सा कट लंबे समय तक टिका रहता है. टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों में ऐसी दिक्कत काफी ज्यादा होती है.
खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से नसों को भी नुकसान होता है. मेडिकल की भाषा में इस परेशानी को 'पेरिफेरल डायबिटिक न्यूरोपैथी' कहते हैं. पैरों में सूईं या पिन गड़ने जैसी झनझनाहट महसूस होती है. कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है कि जैसे वे रूई के फाहों पर चल रहे हैं. वहीं, कुछ लोगों को पत्थर पर चलने जैसा एहसास होता है. यदि आपके साथ भी ऐसा है तो तुरंत किसी डॉक्टर की राय लें.
टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों में एरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ी समस्या भी देखने को मिलती है. मेडिकल की भाषा में इसे बैलेनाइटिस कहते हैं. एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. होम्स वॉकर कहती हैं कि यदि आपको लिंग में सूजन, लाल पड़ने, दर्द या डिस्चार्ज की समस्या हो रही है तो ये डायबिटीज-2 की दिक्कत हो सकती है.
डायबिटीज-2 की बीमारी इंसान की मनोदशा पर भी बुरा असर डालती है. आप इसे मूड डिसॉर्डर कह सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार में से एक डायबिटीज रोगी को डिप्रेशन, जबकि छह में से एक रोगी को एन्जाइटी की शिकायत होती है. इंसान के मानसिक संतुलन के लिए खून में शुगर लेवल की मात्रा का बैलेंस होना बहुत जरूरी है.
क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज से इंसान की आंखें तक खराब हो सकती हैं. हालांकि, संभवत: ऐसा डायबिटीज के बहुत एडवांस स्टेज पर ही होता है. हाई ब्लड ग्लूकोज आंखों के रेटिना में मौजूद रक्त कोशिकाओं को खराब कर देता है. इस स्थिति में इंसान को आंखों के सामने काले रंग के धब्बे तैरते नजर आने लगते हैं या फिर धुंधला दिखने लगता है.
होम्स वॉकर कहती हैं कि डायबिटीज के मरीजों में 'पीरियडॉन्टिटिस' की संभावना तीन गुना ज्यादा होती है. ये एक ऐसा विकार है जिसमें इंसान के मसूड़ों से खून आने लगता है और उसके दांत भी जल्दी ही गिर जाते हैं. मसूड़ों का लाल पड़ना या सूजन भी डायबिटीज के प्रमुख लक्षण हैं. ऐसे लोगों को डायबिटीज स्पेशलिस्ट और डेन्टिस्ट दोनों से संपर्क करना चाहिए.