प्राचीन काल से आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में खाया गया खाना सेहत के लिहाज से फायदेमंद माना जाता है. आज भी कई घरों में ज्यादातर लोग पानी पीने के लिए तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करते हैं. यूं तो आप सभी ने इसके फायदों के बारे में सुना होगा पर आज हम आपको बताएंगे कि तांबे के बर्तन में पानी पीने से शरीर को एक नहीं बल्कि अनेक फायदे होते हैं.
आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखे पानी दिल को स्वस्थ बनाकर ब्लड प्रेशर को कम करके कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. तांबे में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं जो शरीर में दर्द और सूजन की समस्या को दूर करते हैं. ऑर्थराइटिस की समस्या से निपटने में भी तांबे का पानी कारगर माना जाता है.
प्राचीन काल में लोग बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट करने के लिए नदियों, झीलों, तालाबों और कुओं में तांबे के सिक्के फेंकते थे, लेकिन आज की पीढ़ी इसके वास्तविक अर्थ को जाने बिना ही सिक्के फेंक देती है.
आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखा गया पानी इसमें पैदा होने वाले बैक्टीरिया को खत्म करके पानी को पूरी तरह से शुद्ध कर देता है.
कॉपर इम्यूनिटी को मजबूत करता है और नई कोशिकाओं के उत्पादन में सहायता करता है. इससे शरीर में घावों को तेजी से भरने में मदद मिलती है.
अगर आप मोटापा कम करने की सोच रहे हैं तो तांबे के बर्तन में रखा पानी एक अच्छा ऑप्शन है. इसका नियमित सेवन करने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी को नियंत्रित किया जा सकता है.
तांबे यानी कॉपर के बर्तन का नियमित रूप से उपयोग करने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है जिससे पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियों से निजात मिल सकती है.
तांबें में एंटी-एजिंग गुण पाए जाते हैं. इसमें रखे पानी पीने से त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और त्वचा में चमक आती है.
प्रतिदिन तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से थायरॉयड ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों का खतरा टल जाता है.
तांबे के बर्तनों को साफ करने के लिए नींबू को काटकर इसपर नमक छिड़क लें और बर्तन पर रगड़ें. इसके अलावा नींबू के रस और नमक की समान मात्रा में बेकिंग सोडा मिलाकर पेस्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.