शरीर में किडनी खून को फिल्टर, टॉक्सिन को बाहर, मिनरल बैलेंस और फ्लूड को मेंटेन रखने का काम करती है. एक स्वस्थ शरीर के पीछे किडनी की बड़ी भूमिका होती है. अनियंत्रित डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर (Diabetes and High blood pressure) के चलते अक्सर लोगों की किडनी डैमेज (Kidney Disease) हो जाती है. किडनी की समस्या होने पर खाने की बहुत सी चीजें प्रतिबंधित होती हैं. डायट्री परहेज इस बात पर निर्भर करता है कि इंसान बीमारी के कौन से स्टेज पर हैं. आइए जानते हैं कि किडनी से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर किन चीजों को खाने से मना करते हैं.
डार्क कलर का सोडा- किडनी विकार से ग्रस्त लोगों को सोडे का सेवन नहीं करना चाहिए. इसमें मौजूद फॉस्फोरस आपकी सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है. सोडे का स्वाद और रंग बदलने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. नमक में भी फॉस्फोरस की कुछ मात्रा पाई जाती है. 200 एमएल सोडे में करीब 50-100 मिलीग्राम फॉस्फोरस पाया जाता है.
एवोकाडो- पोटैशियम से भरपूर एवोकाडो भी किडनी रोग झेल रहे लोगों के लिए सही नहीं है. एक कप एवोकाडो में करीब 727 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है, जिससे किडनी के मरीजों को सख्त परहेज करना चाहिए. किडनी मरीजों को खाने में पोटैशियम की कम से कम मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी जाती है.
केला- इंस्टेंट एनेर्जी का बेहतरीन स्रोत केला भी हाई पोटैशियम फूड है. इसमें सोडियम की मात्रा तो कम होती है, लेकिन करीब 422 मिलीग्राम पोटैशियम होता है. किडनी के मरीजों को डेली डाइट में केले खाना भारी पड़ सकता है.
ब्राउन राइस- ब्राउन राइस भी फॉस्फोरस और पोटैशियम के मुख्य स्रोत माने जाते हैं. एक कप ब्राउन राइस में करीब 150 मिलीग्राम फॉस्फोरस और 154 मिलीग्राम पोटैशियम होता है. अगर आप ब्राउन राइस खाना बंद नहीं करते तो अपनी डाइट में फ़ॉस्फ़ोरस और पोटैशियम वाले फूड कम ही रखिए ताकि उसे बैलेंस किया जा सके.
आलू- आलू भी किडनी मरीजों की सेहत के लिए सही नहीं है. एक मिडियम साइज के आलू में लगभग 610 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है. आलू को काटने के बाद उसमें करीब 10 मिनट तक उबालने से इसमें पोटैशियम की मात्रा को कम किया जा सकता है.
संतरा- विटामिन-सी से भरपूर संतरा भी एक हाई पोटैशियम फूड है. एक बड़े संतरे में करीब 333 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है. एक कप ऑरेंज जूस से शरीर को लगभग 473 मिलीग्राम पोटैशियम मिलता है. संतरे की जगह अंगूर, सेब और क्रैनबैरी का सेवन करना अच्छा विकल्प है.
डेयरी प्रोडक्ट- डेयरी प्रोडक्ट में कई तरह के मिनरल और विटामिन होते हैं, लेकिन इनमें भी फॉस्फोरस और पोटैशियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इसके अत्यधिक सेवन का किडनी मरीजों की हड्डियों पर काफी बुरा असर हो सकता है. हड्डियों में फासफॉरस के बढ़ने से कैल्शियम की कमी होने लगती है, जिसके कारण इंसान की हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं.
गेहूं की ब्रेड- नाश्ते में खाए जाने वाले ब्रेड को लेकर भी बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. किडनी के मरीजों को फाइबर से भरपूर गेहूं की ब्रेड खाने से बचना चाहिए. इसमें फॉस्फोरस और पोटैशियम की भी बहुत ज्यादा मात्रा होती है. इसकी 20 ग्राम सर्विंग में लगभग 57 मिलीग्राम फॉस्फोरस और 69 ग्राम पोटैशियम पाया जाता है.
कैन सूप- कैन सूप में सोडियम की अत्यधिक मात्रा भी ऐसे रोगियों के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं माना जाती है. बाजार में मिलने वाले डिब्बे में बंद सूप से जितनी जल्दी हो सके, दूरी बना लीजिए. आपको खाने के ऐसे विकल्प तलाशने चाहिए जिनमें नमक या सोडियम की मात्रा बेहद कम रहे.
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