हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरुक करने के लिए ये दिन मनाया जाता है. सामान्यत: खून के किसी थक्के के बीच में आने की वजह से खून दिल तक नहीं पहुंच पाता और सीने में तेज दर्द होता है लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है. कई बार ये बड़ी ही खामोशी से लोगों को अपना शिकार बना देता है. इसे साइलेंट हार्ट अटैक भी कहते हैं. साइलेंट हार्ट अटैक को इसलिए बेहद घातक माना जाता है क्योंकि अधिकतर लोगों को इसका पता ही नहीं चल पाता है. इसी वजह से वे सही वक्त पर इलाज भी नहीं करवा पाते हैं.
साइलेंट हार्ट अटैक में कई बार सीने में दर्द होता ही नहीं है या फिर बहुत हल्का दर्द होता है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लोगों को लगता है कि ये गैस की समस्या की वजह से हो रहा है.
ज्यादा लोगों को शिकार बनाता है साइलेंट हार्ट अटैक- पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें दिल की बीमारी से होती हैं और उनमें भी साइलेंट हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या ज्यादा है. एक स्टडी के मुताबिक, दिल के दौरे के 45 फीसदी मामले साइलेंट हार्ट अटैक के होते हैं. इस तरह के दौरे में लोगों को पता भी नहीं चलता है कि उन्हें हार्ट अटैक आया है.
साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण- इस तरह के हार्ट अटैक में जरूरी नहीं कि सीने में ही दर्द हो. कई बार मरीज के जबड़े, गर्दन, हाथ, पेट या पीठ में भी दर्द होता है. सांस लेने में तकलीफ होने के साथ ही कमजोरी भी महसूस होती है. इसमें मरीज को लगातार उल्टियां होती हैं, चक्कर आते हैं और पसीना खूब आता है, दिल में बेचैनी होती है. सीने में तेज दर्द ना होने की वजह से लोग ये नहीं समझ पाते हैं कि ये दिल की बीमारी हो सकती है.
सर्दियों में ज्यादा खतरा
सर्दियों में शरीर के तापमान को बरकरार रखने के लिए हृदय को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है. इस वजह से रक्तचाप बढ़ता है और यह रक्त में कई किस्म के बदलाव भी लाता है जिनमें रक्त का थक्का जमने का अधिक जोखिम भी शामिल है. इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे रक्त प्रवाह संकुचित होने लगता है और यह भी हार्ट अटैक का कारण बनता है. हार्ट में ऑक्सीजन की अधिक मांग होने, शरीर का तापमान असामान्य ढंग से कम होने, छाती में संक्रमण पैदा करने वाले वायु प्रदूषकों आदि के चलते हार्ट अटैक के मामले बढ़ सकते हैं.
हार्ट अटैक के जोखिम से घिरे अधिक उम्र के लोग साइलेंट हार्ट अटैक के झटके को अमूमन नहीं झेल पाते. यह हृदय पर इतना जबरदस्त दबाव बनाता है कि कई बार मरीज मदद के लिए पुकार भी नहीं पाता.
लापरवाही पड़ सकती है भारी- साइलेंट हार्ट अटैक का सबसे बड़ा नुकसान इसी वजह से उठाना पड़ता है क्योंकि आमतौर पर लोग सीने के दर्द को ही हार्ट अटैक समझते हैं. लोगों को हर लक्षण पर ध्यान देना जरूरी है. कुछ भी गलत महसूस होने पर अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें.
ऐसे करें बचाव- कुछ नियमों का पालन कर साइलेंट हार्ट अटैक से बचा जा सकता है. जैसे ठंड में सैर करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है जिसकी वजह से दिल पर दबाव पड़ता है. इसकी बजाय धूप में सैर करने से शरीर को गरमी और विटामिन डी मिलेगा. घर में रहते हुए भी हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जरूर करें. प्राणायाम करें और समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर भी चेक करते रहें. तेल और ज्यादा मसाले वाला खाना खाने से बचें और सादा खाना खाएं. जितना हो सके, वायु प्रदूषण से बचें.