यौन से संबंधित बीमारियों में एचआईवी को सबसे खतरनाक माना जाता है. संभवत: ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसे पूरी तरह ठीक करने की दवा अब तक विकसित नहीं की जा सकी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑगेनाइजेशन की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनिया भर में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजहों में एचआईवी संक्रमण प्रमुख है.
लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एचआईवी और एड्स में अंतर है. एचआईवी पॉजीटिव होने का मतलब ये नहीं कि उस व्यक्ति को एड्स हो गया है. इसलिए इसके बारे में सही जानकारी बेहद जरूरी है.
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कितने लोग हैं इसके शिकार
WHO की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में फिलहाल 35.3 मिलियन यानी करीब साढ़े तीन करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं. इनमें से करीब-करीब 21 लाख लोगों की उम्र 10 से 19 साल के बीच है।
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बच्चों में संक्रमण
सही समय पर जांच व इलाज करवा लिया जाए, तो संक्रमित गर्भवती मां से होने वाले बच्चे को इस रोग से बचाया जा सकता है। एक आंकड़े के अनुसार साल 2012 में एचआईवी से संक्रमित 62 फीसदी गर्भवती महिलाओं के बच्चों को इसी तरह संक्रमण से बचाया गया था.
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टीबी का खतरा
चुकी एचआईवी संक्रमण होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, इसलिए टीबी का खतरा काफी बढ़ जाता है। साल 2012 में एचआईवी संक्रमित करीब तीन लाख 32 हजार रोगियों की मौत टीबी से हुई।
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इससे बचने के उपाय