अगर आप दांतों को लेकर एकस्ट्रा केयरफुल हैं और माउथवॉश जैसे उपाय आजमा रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए. कहीं ऐसा तो नहीं है कि जिन उपायों को आप दांतों के लिए अच्छा समझ रहे हैं वो आपको नुकसान पहुंचा रहे हों. आपको बता दें कि दांतों की सफाई और मुंह की दुर्गंध के लिए माउथवॉश का इस्तेमाल करना कोई समझदारी नहीं है.
दिन में कई बार माउथवॉश से गरारा करने पर दांतों में पीलापन और मुंह में ड्राइनेस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सर गंगाराम हॉस्पिटल के मेडीसिन हेड डॉक्टर एस पी बयोत्रा का मानना है कि दांतों की रोजाना की सफाई के लिए अच्छे से ब्रशिंग ही काफी है. दिल्ली की एक डेंटिस्ट रिति मेहरा का कहना है कि जरूरत ना होने पर ज्यादा समय तक माउथवॉश का इस्तेमाल किया जाए तो इसका उल्टा असर दिख सकता है.
रिसर्च से साबित हो चुका है कि 80 फीसदी मामलों में मुंह से दुर्गंध आने पर माउथवॉश या किसी च्यूइंग गम की जरूरत नहीं होती है. मुंह से दुर्गंध आने का मुख्य कारण है बैक्टीरिया है जो आपकी जीभ में होता है और इसको रोजाना साफ करना बेहद जरूरी है. इसके अलावा दांतों के बीच में खाने के कण रह जाते हैं जिन्हें सिर्फ ब्रश कर के ही निकाला जा सकता है. इसके लिए माउथवॉश का इस्तेमाल करना कोई चतुराई नहीं है.
डॉ. मेहरा के अनुसार मिंट स्प्रे और च्यूइंग गम आपके मुंह से बैक्टीरिया हटाने में मदद नहीं करते हैं, वे सिर्फ समस्या को कुछ देर के लिए रोककर आपको राहत दे सकते हैं. सिर्फ और सिर्फ ब्रशिंग से ही आपके दातों और मसूड़ों में लगे खाने के कण साफ हो सकते हैं.
दांतों की सफाई से जुड़े भ्रम
भ्रम- 1: खराब ब्रशिंग के कारण मुंह से दुर्गंध आती है.
सही तथ्य: ये कई कारणों से हो सकता है, जिसमें एक वजह डेंटल हाइजीन भी है. कभी-कभी प्याज जैसी चीजे खाने से भी ये समस्या हो सकती है.
भ्रम- 2: खाना खाने के बाद शूगर फ्री च्यूइंग गम चबाना ब्रशिंग से भी ज्यादा असरदार है.
सही तथ्य: ये आपके दांतों को साफ करने और सांसों को महकाने में मदद कर सकता है लेकिन इसके बाद भी आपको दांतों से प्लाक निकालने के लिए ब्रशिंग की जरूरत पड़ेगी ही.
दांतों के लिए ये है फायदेमंद
सेब: इसमें काफी मात्रा में फाइबर होता है जो दांतों के लिए नेचुरल क्लींजर है. इसमें काफी पानी होता है जो शूगर को भी कम करने में मदद करता है.
चीज़: चीज़ मुंह में मौजूद सलाइवा के फ्लो को बढ़ाने में मदद करता है. इसे एंटी कैवेटी एजेंट भी कह सकते है. एक स्टडी में पाया गया है कि जो बच्चे चीज़ खाते हैं उनके मुंह में एसिड लेवल कम होता है.
गाजर: डॉक्टर आहूजा का कहना है कि गाजर विटामिन ए का एक अच्छा सोर्स है. ये दांतों के इनामेल बनाने में मदद करता है और दांतों को सेन्सिटिविटी जैसी समस्याओं से बचाता है.
दूध: अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन की एक स्टडी के अनुसार कुछ मीठा खाने के बाद एक ग्लास दूध पीने से मुंह में एसिड का लेवल कम होता है. डॉक्टर मेहरा का कहना है कि इससे बढ़ते बच्चों के दांत भी मजबूत होते है. लेकिन दूध पीने के बाद अपने दांतों को पानी से साफ करना ना भूलें.