कोरोना वायरस की खतरनाक बीमारी ने भारत में एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कोरोना के इस संकट काल में लोग काफी घबराए हुए हैं. चारों तरफ से आ रही मौत की खबरों से दहशत और ज्यादा फैल गई है. इस बीच मुंबई के एक प्रसिद्ध डॉक्टर शशांक जोशी ने रविवार को पीएम मोदी के विशेष कार्यक्रम 'मन की बात' में अहम जानकारी दी. डॉ. जोशी को कोरोना के इलाज और इससे जुड़ी रिसर्च का अच्छा अनुभव है.
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डॉ. शशांक जोशी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ी तेजी से अपना असर दिखाया है. हालांकि इसमें एक अच्छी बात ये है कि भारत में रिकवरी रेट पहले से ज्यादा बेहतर है और डेथ रेट भी कम हुआ है. इसमें एक फर्क ये आया है कि अब ये बच्चों और युवाओं में भी तेजी से फैल रहा है.
डॉ. जोशी ने बताया कि पिछली बार की तरह मरीजों को इस बार भी सांस में तकलीफ, सूखी खांसी, बुखार और लॉस ऑफ टेस्ट एंड स्मैल की शिकायत हो रही है. हालांकि 80-90 प्रतिशत लोगों में इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. ऐसे में लोग काफी ज्यादा घबरा गए हैं.
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वायरस का म्यूटेशन भी एक बड़ी चिंता का विषय है. इसे लेकर डॉ. जोशी ने कहा, 'वायरस के म्यूटेशन से घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसा म्यूटेशन अक्सर होता रहता है. जैसे हम इंसान कपड़े बदलते हैं, ठीक वैसे ही वायरस अपना रंग बदलता रहता है. इस तरह के वायरस और उनकी लहर आती-जाती रहती है, जिन्हें कंट्रोल किया जा सकता है. बस हमें सतर्कता बरतने की जरूरत है. हमें 14 से 21 दिन बड़ी सावधानी के साथ निकालने चाहिए.'
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कोविड-19 के इलाज पर बोलते हुए डॉ. जोशी ने कहा, 'क्लीनिकल ट्रीटमेंट लोग बहुत देरी से चालू करते हैं. वे सोचते हैं कि ये बीमारी अपने आप खत्म हो जाएगी. वे मोबाइल पर आने वाली अफवाहों पर विश्वास करने लगते हैं.' उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सूचनाओं का पालन करें और अपना व अपने परिवार का ख्याल रखें.
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डॉ. जोशी ने बताया कि कोविड-19 में तीन प्रकार के लक्षण नजर आते हैं- हल्के, मध्यम और गंभीर. हल्के कोविड में डॉक्टर ऑक्सीजन, पल्स, और बुखार की मॉनिटरिंग करते हैं. बुखार बढ़ने पर पैरासिटामोल जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि मध्यम और गंभीर कोविड-19 लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह से इलाज किया जाता है.
उन्होंने कहा कि भारत में कोविड-19 के खतरे को कम करने के लिए सही और सस्ती दवाएं उपलब्ध हैं. यहां ऐसे कई स्टेरॉयड, टैबलेट और इनहेलर्स हैं जो लोगों की जान बचा सकते हैं. जान बचाने वाली ऑक्सीजन थैरेपी भी मरीजों को दी जा रही है. इसके अलावा और भी कई छोटे-छोटे इलाज हैं जो डॉक्टर्स की देख-रेख में मरीजों को मिल रहे हैं.
डॉ. जोशी ने बताया कि रेमेडेसिवीर एक नई और एक्सपेरिमेंटल दवा है. इस दवा से मरीज की रिकवरी जल्दी हो जाती है और उसे अस्पताल में दो से तीन दिन कम रहना पड़ता है. ये दवा शुरुआती 9 से 10 दिन में दी जाती है और 5 दिनों तक देनी पड़ती है. हालांकि मरीज की हालत ज्यादा खराब होने या ऑक्सीजन के सहारे सांस ले रहे मरीजों को ही इसकी जरूरत पड़ती है. ये सिर्फ डॉक्टर्स की सलाह पर दी जाती है.
डॉ. जोशी ने प्राणायाम के फायदों के बारे में भी बताया है. उन्होंने कहा कि प्राणायाम करने से हमारे फेफड़े दुरुस्त रहेंगे. साथ ही अगर मरीज को खून पतला करने वाले हिपेरिन इंजेक्शन दिए जाएं तो 98 प्रतिशत मरीज जल्दी रिकवर हो जाएंगे. इसलिए पॉजिटिव रहना और डॉक्टर्स की सलाह पर इलाज कराना बहुत जरूरी है. महंगी दवाओं के पीछे दौड़ने से कोई फायदा नहीं होने वाला है.
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