कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर जैसी-जैसी खबरें आ रही हैं, पूरी दुनिया की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. इस समय लगभग 150 वैक्सीन का ट्रायल जारी है जिसमें से छह वैक्सीन अपने आखिरी चरण के ट्रायल में हैं. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक लोगों को एक कारगर वैक्सीन जरूर मिल जाएगी. आइए जानते हैं इन वैक्सीन की खासियत और इस वैक्सीन की कीमत के बारे में.
मैसाचुसेट्स स्थित बायोटेक कंपनी अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के साथ मिलकर एक नए तरीके की वैक्सीन पर काम कर रही है. ये वैक्सीन वायरस के जेनेटिक मैटेरियल, मैसेंजर आरएनए (mRNA) पर काम करती है. अन्य वैक्सीन की तरह ये वास्तविक वायरस पर काम नहीं करता है बल्कि ये एक वायरल प्रोटीन बनाता है जो कोरोना वायरस की नकल करता है. ये एक नई तरह की तकनीक है. अगर इसे मंजूरी मिलती है तो mRNA-1273 इस तरह की पहली वैक्सीन होगी. इस वैक्सीन की कीमत 32-37 डॉलर (2,388- 2,761 रुपए) होगी.
न्यूयॉर्क स्थित फाइजर (Pfizer) जर्मन बायोटेक कंपनी BioNTech के साथ वैक्सीन पर काम कर रही है. ये वैक्सीन भी mRNA प्लेटफॉर्म पर आधारित है. ये जर्मन कंपनी पहले भी कैंसर की प्रायोगिक वैक्सीन बना चुकी है. फाइजर ने अमेरिकी सरकार के साथ लगभग 195 करोड़ वैक्सीन की आपूर्ति करने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. उम्मीद की जा रही है कि इस वैक्सीन को अक्टूबर 2020 तक रेगुलेटरी मंजूरी मिल जाएगी. इस वैक्सीन की कीमत 19.50 डॉलर (1454 रूपए) तक रखी गई है.
ऑक्सफोर्ड ने ChAdOx1 nCoV-19 वैक्सीन के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी की है. ये वैक्सीन अपने अंतिम चरण के ट्रायल में है. अगर ये वैक्सीन सफल होती है तो उम्मीद की जा रही है कि ये सितंबर के महीने तक लोगों के लिए बाजार में आ जाएगी. इस वैक्सीन की कीमत 4 डॉलर (297 रूपए) होगी.
चाइना नेशनल बायोटेक ग्रुप (CNBG) की सिनोफार्म कंपनी का कहना है कि उसकी वैक्सीन दिसंबर तक बाजार में आ जाएगी. कंपनी के सीईओ का कहना है कि वैक्सीन की दो डोज के लिए 1000 युआन (10,853 रुपए) से कम देने होंगे. इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल अबू धाबी, यूएई में 15000 वालंटियर्स पर किया जा रहा है.
सिनोवैक बायोटेक की कोरोनावैक वैक्सीन एक इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है यानी ये वैक्सीन निष्क्रिय विषाणु पर आधारित है. इसके तीसरे चरण के ट्रायल के लिए 9000 लोगों की भर्ती की जा रही है, जिसमें ज्यादातर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हुए लोग होंगे. तीसरे चरण का ट्रायल ब्राजील में कई जगहों पर किया जाएगा. हालांकि अभी इसकी कीमत तय नहीं की गई है.
Ad5-nCoV वैक्सीन को चीन में सैन्य इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है. CanSinoBIO की ये वैक्सीन एडिनोवायरस आधारित वायरल वेक्टर तकनीक पर बनी है. इसे बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सहयोग से बनाया गया है. 29 जून, 2020 को चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग ने Ad5-nCoV को चीनी सेना में एक साल तक लगाने की मंजूरी दे दी है.
भारत की सीरम कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है. सीरम इंस्टीट्यूट ने करोड़ों की संख्या में वैक्सीन बनाने की डील की है. कंपनी के चेयरमैन साइरस पूनावाला का कहना है कि उसकी वैक्सीन की कीमत 1000 रूपए होगी लेकिन अगर सरकार चाहे तो वो अपनी नागरिकों को इसे मुफ्त में भी दे सकती हैं. SII के कार्यकारी निदेशक सुरेश जाधव का कहना है कि जैसे ही वैक्सीन का तीसरा ट्रायल शुरू होगा, वैक्सीन बनाने का काम शुरू हो जाएगा.
11 अगस्त को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया था कि उन्होंने दुनिया की पहली कोरोना वायरस की वैक्सीन Sputnik V लॉन्च कर दी है. रूस का दावा है कि ये वैक्सीन इम्यूनिटी को बढ़ाने में कारगर साबित हुई है. रूस के डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के सीईओ का कहना है कि वो इस वैक्सीन की बड़ी मात्रा में प्रोडक्शन के लिए भारत के साथ पार्टनरशिप करना चाहता है. इसकी कीमत को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है.