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लाइफस्टाइल न्यूज़

Corona: पुराने स्ट्रेन से कितने अलग डेल्टा वेरिएंट के लक्षण? जानें क्यों है इतना खतरनाक

कोरोनवायरस1
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एक साल से अधिक समय बीत चुका है लेकिन कोरोनवायरस ने लोगों के जीवन को कई तरह से प्रभावित किया है. इसने न केवल मनुष्य के जीवन पर असर डाला है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट, जैसे डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट लोगों के बीच चिंता का विषय बने हुए हैं. इसके अलावा, हाल ही में हुए शोध के अनुसार, डेल्टा वेरिएंट के लक्षण कोविड वैक्सीन के लक्षणों से अलग पाए गए हैं.

(photo credit- pixabay)

 

कार्बन कॉपिज2
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डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एक वायरस रेप्लिकेट करता है यानी अपनी कार्बन कॉपिज बनाता है. इस प्रकिया को म्यूटेशन कहते हैं. एक या एक से अधिक नए म्यूटेशन वाले वायरस को मूल वायरस के वेरिएंट के रूप में जाना जाता है.
(photo credit- pixabay)

वायरस3
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एक्सपर्ट ने बताया कि जब SARs-COV-2 वायरस की बात आती है तो इसमें कई बार म्यूटेशन हुआ है. डेल्टा वेरिएंट भी इसी पैदा हुआ है. इसे B.1.617.2 के रूप में भी जाना जाता है. इस वेरिएंट को अब तक का सबसे प्रमुख स्ट्रेन माना जा रहा है.
(photo credit- pixabay)

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म्यूटेशन4
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वहीं, मूल स्ट्रेन के विरोध में, म्यूटेशन में जीनोमिक सिक्वेन्स में अंतर हो सकता है. ये इन्हें तेज गति से स्वस्थ कोशिकाओं से जुड़ने की अनुमति प्रदान करता है. डेल्टा वेरिएंट में E484Q और L452R दो तरह के म्यूटेशन होते हैं. यही वजह है कि इसे मूल स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा संक्रामक कहा गया है.
(photo credit- pixabay)

वायरल5
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जब वायरल संक्रमण से संक्रमित होने की बात आती है तो ये दो फैक्टर्स पर निर्भर कर सकता है. एक वायरल फैक्टर से संबंधित है, जबकि दूसरे में होस्ट फैक्टर शामिल हैं. एक ओर वायरल फैक्टर्स में संक्रमण की दर, रेप्लिकेशन की गति, संचरण का तरीका और भी कई चीजें शामिल हैं. ये वायरस के म्यूटेशन के साथ बदलता है. तो दूसरी ओर, होस्ट फैक्टर उम्र, लिंग, दवाएं, आहार, व्यायाम, स्वास्थ्य और तनाव को ध्यान में रखते हैं.
(photo credit- pixabay)

डेटा6
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इसलिए, जब किसी विशेष वायरस के संकेतों और लक्षणों का पता लगाया जाता है तो ज्यादा में से सबसे सामान्य का पता लगाने के लिए व्यक्तियों से पर्याप्त डेटा एकत्र करने की आवश्यकता होती है.
(photo credit- pixabay)

म्यूटेशन7
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चूंकि डेल्टा वेरिएंट मूल स्ट्रेन का म्यूटेशन है. इसलिए कहा जाता है कि म्यूटेशन के दौरान लक्षण भी बदल सकते हैं. मोबाइल ऐप के माध्यम से एक सेल्फ-रिपोर्टिंग सिस्टम के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम के डेटा से पता चलता है कि सबसे सामान्य कोविड लक्षण मूल कोविड लक्षणों से अलग हैं.
(photo credit- pixabay)

बुखार8
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लक्षण ऐप पर एकत्र किए गए डेटा से पता चलता है कि बुखार, खांसी, सिरदर्द और गले में खराश कोरोना वायरस के सामान्य ​​लक्षण बने हुए हैं. पहले के आंकड़ों में नाक बहने जेसे लक्षण शायद ही रिपोर्ट किए गए थे. इसके अलावा, सूंघने की क्षमता का कम होना, जो पहले काफी सामान्य था, अब नौवां सबसे आम लक्षण है. एक्सपर्ट का मानना है कि लक्षणों में बदलाव वैक्सीनेशन का परिणाम हो सकता है.
(photo credit- pixabay)

वायरस9
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इसके अलावा लक्षणों में बदलाव के पीछे वायरस का विकास भी एक कारण हो सकता है. डेल्टा वेरिएंट की विभिन्न विशेषताओं (वायरल फैक्टर्स) को देखते हुए लक्षण भी बदल सकते हैं. हालांकि, इस बात को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है.
(photo credit- pixabay)

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कोविड वैक्सीन10
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इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि क्या कोविड वैक्सीन डेल्टा या इसके नए उभरते वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी होंगी. जबकि अध्ययनों ने दावा किया है कि कुछ कोविड वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती हैं. भारत बायोटेक के कोवैक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड और रूस निर्मित वैक्सीन स्पुतनिक वी सभी को डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी बताया गया है. इसके अलावा, यूके की एक स्टडी के अनुसार, फाइजर बायोएनटेक वैक्सीन को अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने के लिए भी कारगर माना जा रहा है.
(photo credit- pixabay)

वैक्सीन लेनी11
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ऐसे में शोधकर्ता वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की एफिकेसी रेट के संबंध में जवाब खोजने की कोशिश कर रहे हैं. ये महत्वपूर्ण है कि हर किसी को समय पर और हर कीमत पर कोविड वैक्सीन लेनी चाहिए.
(photo credit- pixabay)

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