हाइड्रोक्लोरोक्वीन के बाद वैक्सीन के मामले में भी भारत एक बड़ा गेमचेंजर साबित होता नजर आ रहा है. वैक्सीन मैनुफैक्चरिंग के बाद अब भारत बड़े वैक्सीन सप्लायर के रूप में भी आगे बढ़ रहा है. भारत के पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के देशी संस्करण कोविशील्ड का उत्पादन हो रहा है, वहीं, भारत बायोटेक की स्वदेशी कोवैक्सीन को भी भारत में मंजूरी मिल चुकी है. भारत में वैक्सीनेशन प्रोग्राम (Corona virus vaccine in india) शुरू गया है. भारत में बन रहीं वैक्सीन में कई देशों की दिलचस्पी है. कुछ देशों ने भारत सरकार से इसकी मांग की है तो कुछ सीधे वैक्सीन डेवलपर कंपनियों को इसके ऑर्डर भेज रहे हैं.
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अब भारत वैक्सीन के प्रोडक्शन और सप्लाई में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को छोड़कर ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों में वैक्सीन भेजी जाएगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, 'कोरोना की महामारी से जंग में भारत शुरुआत से आगे रहा है. भारत इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग को, विशेष रूप से अपने पड़ोसी देशों के लिए कर्तव्य के रूप में देखता है.'
नेपाल- नेपाल की ड्रग रेगुलेटरी ने शुक्रवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है. ड्रग रेगुलरी ने पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई कोविशील्ड वैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी देने का फैसला किया. नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने भारत दौरे से पहले 12 मिलियन डोज लेने की इच्छा जाहिर की थी, जो भारत संभवत: दे सकता है.
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भूटान-मालदीव- सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (पुणे) द्वारा मैनुफैक्चर की जा रही कोविशील्ड वैक्सीन में भूटान ने भी दिलचस्पी दिखाई है. भूटान ने भारत से इसके 10 लाख डोज मांगे हैं. इसी तरह मालदीव भी वैक्सीन के लिए भारत के साथ लगातार संपर्क में है.
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म्यांमार- म्यांमार ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से वैक्सीन खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. म्यांमार की स्टेट काउंसिलर आंग यान सू की ने नए साल पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा था, 'भारत के साथ वैक्सीन के पहले बैच की खरीदारी के समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. वैक्सीन लाने की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं. भारत से बहुत जल्द वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाएगी.'
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बांग्लादेश- भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने भी 3 करोड़ डोज़ काी मांग की है. बांग्लादेश की बेक्सिम्को फार्मास्यूटिकल कंपनी ने सीरम इंस्टिट्यूट से कोविशील्ड के 30 मिलियन डोज खरीदने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. देश के ड्रग रेगुलेटर ने पहले ही भारतीय वैक्सीन के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी थी.
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श्रीलंका- श्रीलंका ने वैक्सीन डोज के लिए भारत से अनुरोध किया है और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कोलंबो में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात के दौरान ये आश्वासन दिया था. इस दौरान श्रीलंका संयुक्त राष्ट्र समर्थित 'कोवैक्स' सुविधा के तहत वैक्सीन लेने का प्रयास कर रहा है जो लो या मिडिल आय वाले 92 देशों को वैक्सीन के लिए सब्सिडी देता है.
अफगानिस्तान- इस मामले में भारत खुद अफगानिस्तान की मदद करने के लिए आगे बढ़ा है. भारत में वैक्सीन के रोलआउट को लेकर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में इसे लेकर वार्ता हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, वैक्सीन के लिए ना सिर्फ पड़ोसी मुल्क, बल्कि दुनियाभर के देशों से मांग उठ रही हैं.
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ब्रिक्स देशों ने भी की मांग- ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे ब्रिक्स देशों ने भी भारतीय वैक्सीन में अपनी दिलचस्पी जाहिर की है. ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो ने खुद पीएम मोदी को लेटर लिखकर 20 लाख कोविशील्ड वैक्सीन की मांग की है. वहीं दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ने भी गुरुवार को कहा कि सीरम इंस्टिट्यू से 15 लाख डोज़ खरीदे जाएंगे.