होली के त्योहार पर लोग जमकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं. हालांकि इस त्योहार पर रंगों में डूबने से पहले इन्हें पहचानना और इनके बुरे प्रभाव को समझना भी जरूरी है. क्योंकि कलर अगर केमिकल वाले हैं तो ये आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि बाजार में बिकने वाले कौन से रंग आपके लिए ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं.
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हरा रंग- होली पर अगर आप हरा रंग खरीदने जा रहे हैं तो बता दें कि इसमें कॉपर सल्फेट का इस्तेमाल होता है. इससे आंखों में खुजली, जलन या इंफेक्शन की समस्या हो सकती है.
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बैंगनी रंग- बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड का इस्तेमाल हो सकता है. इससे लोगों को अस्थमा या एलर्जी होने का खतरा रहता है. ये गहरा रंग कई दिनों तक हमारी स्किन पर रह सकता है.
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सिल्वर कलर- ज्यादातर युवा सिल्वर कलर का इस्तेमाल करते हैं. सिल्वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल होता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि एल्युमिनियम ब्रोमाइड से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
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काला रंग- होली पर अगर आप काले रंग का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बता दें कि इसमें लेड ऑक्साइड का प्रयोग होता है, जिससे किडनी और दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है.
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लाल रंग- होली पर लोगों को लाल रंग भी काफी रास आता है. लाल रंग में मरक्यूरी सल्फेट का इस्तेमाल किया जाता है. इससे स्किन कैंसर, पैरालाइज यानी लकवा होने का खतरा भी रहता है.
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हर्बल कलर हैं सेफ- होली का 95% व्यापार सिंथेटिक रंगों से चलता है. हर्बल कलर दो से तीन गुना ज्यादा महंगे होते है. इन कलर के हर्बल होने की भी गारंटी नहीं होती. ऐसे में ग्राहकों के लिए समस्या बड़ी हो जाती है. पर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो ख़तरा कम किया जा सकता है.
कैसे करें हर्बल कलर्स की पहचान- हर्बल कलर की चमक सिंथेटिक रंगों से कम होती है. गुलाब का रंग गुलाबी होगा, चमकदार लाल नहीं होगा. हर्बल कलर अंगुलियों पर दरदरा महसूस नहीं होगा.
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एक और बात ध्यान रखें कि ऑर्गेनिक कलर्स आमतौर पर ज्यदा खुशबूदार नहीं होते हैं. संभव हो तो घर में तैयार रंगों का ही इस्तेमाल करें.
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