कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट से पूरी दुनिया परेशान है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये वेरिएंट इतना संक्रामक और मजबूत है कि इस पर वैक्सीन का असर भी बहुत ज्यादा नहीं हो रहा है. हालांकि डेल्टा वेरिएंट पर हर वैक्सीन कंपनी के अपने-अपने दावे हैं. अब जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने दावा किया है कि उसकी सिंगल डोज COVID-19 वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट और वायरस के अन्य स्ट्रेन पर काफी असरदार है.
जॉनसन एंड जॉनसन का कहना है कि उसकी वैक्सीन संक्रमण के खिलाफ लंबे समय तक दोहरी सुरक्षा देती है. कंपनी के डेटा के मुताबिक उसकी वैक्सीन लेने वाले लोगों में कम से कम आठ महीने तक इम्यून रिस्पॉन्स पाया गया है. कंपनी का कहना है कि इसकी वैक्सीन 85% तक प्रभावी है. साथ ही ये अस्पताल में भर्ती होने और मौत से भी बचाती है.
जॉनसन एंड जॉनसन के अनुसंधान प्रमुख डॉक्टर मथाई मैमेन ने कहा, 'आठ महीने के डेटा में पता चला है कि जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल शॉट वैक्सीन मजबूत न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी बनाती है जो समय के साथ-साथ बढ़ती जाती है.'
कंपनी का कहना है कि डेटा में जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन लेने वाले लोगों में डेल्टा सहित सभी वेरिएंट के खिलाफ मजबूत न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी पाई गई है. कंपनी ने अपनी वैक्सीन का डेटा bioRxiv पर प्रीप्रिंट के रूप में सबमिट किया है. हालांकि इस स्टडी की समीक्षा अभी नहीं की गई है.
WHO के मुताबिक कोरोना का डेल्टा वेरिएंट अब धीरे-धीरे कई और देशों में भी फैलने लगा है. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के एक डेटा के मुताबिक, ब्रिटेन में डेल्टा वेरिएंट से अब तक करीब 117 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 50 साल से ज्यादा उम्र के 109 लोग शामिल हैं. इनमें 50 ऐसे लोग भी हैं जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थीं.
ब्रिटेन में कुछ दिनों पहले जारी एक डेटा के मुताबिक फाइजर के दोनों डोज लेने के बाद डेल्टा वेरिएंट से 88 प्रतिशत तक बचाव हो सकता है. जबकि एस्ट्राजेनेका 60 प्रतिशत तक इस जानलेवा वेरिएंट से बचाव कर सकती है.
वहीं अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की एक स्टडी में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन भी काफी असरदार पाई गई है. NIH का कहना है कि कोवैक्सीन Covid-19 के अल्फा और डेल्टा दोनों वेरिएंट को 'प्रभावी रूप से बेअसर' करता है.