दूषित पानी और अधपके मांस में पाया जाने वाला एक साधारण परजीवी लोगों में ब्रेन कैंसर (Brain Cancer) की समस्या से जुड़ा हो सकता है. सोमवार को शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है. उन्हें इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि टोक्सोप्लाज्मा गोंडी या टी गोंडी परजीवी से संक्रमित लोगों में बेहद घातक ग्लायोमा (एक प्रकार का ट्यूमर) विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है. एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया की 20 से 50 फीसदी आबादी इस परजीवी से संक्रमित हो चुकी है.
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इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह परजीवी दिमाग में अल्सर के रूप में हो सकते हैं और इन्फ्लेमेशन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. 'अमेरिकन कैंसर सोसायटी के डिपार्टमेंट ऑफ पॉपुलेशन' के एपिडेमायोलॉजिस्ट जेम्स हॉज के नेतृत्व में उनकी टीम और कैंसर सेंटर एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (फ्लोरिडा) की एच. ली मॉफिट ने ब्लड सैंपल में टी गोंडी परजीवी के एंटीबॉडीज और ग्लायोमा (ट्यूमर) के जोखिम के बीच संबंध की जांच की. इसके लिए उन्होंने लोगों को दो समूहों में बांटा.
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इस स्टडी के लिए 'अमेरिकन कैंसर प्रिवेंशन स्टडी- II न्यूट्रिशन कोहॉर्ट' में पंजीकृत 111 लोगों और 'नॉविजन कैंसर रजिस्ट्री' में सूचीबद्ध 646 लोगों को शामिल किया गया था. शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्लायोमा का खतरा उन लोगों में ज्यादा देखा गया जिनमें टी. गोंडी एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा था.
शोधकर्ताओं ने कहा, 'इस स्टडी के निष्कर्ष टी गोंडी इंफेक्शन और ग्लायोमा के जोखिम के बीच संबंध के पहले संभावित प्रमाण हैं, जिसकी पुष्टि किसी स्वतंत्र शोध में की जानी चाहिए.' प्रमुख शोधकर्ता हॉज ने कहा, 'इसका मतलब यह नहीं है कि टी गोंडी सभी स्थितियों में निश्चित रूप से ग्लायोमा (दिमाग में होने वाला एक प्रकार ट्यूमर) का कारण बनता है. ग्लायोमा वाले कुछ रोगियों में कोई टी गोंडी एंटीबॉडी नहीं होती है.'
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एक शोधकर्ता ने कहा, 'यह स्टडी दर्शाती है कि जिन लोगों में टी. गोंडी परजीवी के संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, उनमें ही ग्लायोमा के विकसित होने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि, इस स्टडी को बड़े और विविध समूह में दोहराने की जरूरत है.'
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