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लाइफस्टाइल न्यूज़

अचानक जागने पर शरीर हिला-डुला नहीं पाते, जानें- क्यों होते हैं ऐसे डरावने अनुभव?

स्लीप पैरालिसिस
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कभी-कभी नींद से उठने के तुंरत बाद शरीर को हिलाने-डुलाने में दिक्कत महसूस होती है. ऐसा लगता है कि कोई चीज आपके हाथ-पैरों को रोक रही है. ऐसा किसी सपने में नहीं बल्कि आप खुली आंखों से महसूस करते हैं. शरीर की इस अवस्था को स्लीप पैरालिसिस कहते हैं. इसमें व्यक्ति दिमागी तौर पर जगा होता है लेकिन शरीर वास्तव में सो रहा होता है. इस दौरान थोड़ी सी भी आवाज बहुत भयावह महसूस होती है. कुछ लोगों को ऐसा भी महसूस होता है जैसे कि उनका दम घुट रहा हो. वहीं, कुछ लोगों को स्लीप पैरालिसिस के दौरान ऐसा महसूस होता है जैसे कि उनका शरीर हवा में उड़ रहा है.

स्लीप पैरालिसिस
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स्लीप पैरालिसिस के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण माने जाते हैं. 'द जर्नल' के मुताबिक, इस विषय पर की गई 35 स्टडीज को 2011 में एक पेपर में छापा गया था. इन स्टडीज में 36,000 वॉलंटियर्स ने भाग लिया था. स्टडीज के लेखकों के मुताबिक, स्लीप पैरालिसिस सबसे ज्यादा छात्रों या फिर ऐसे लोगों में पाया जाता है जिनका स्लीपिंग पैटर्न खराब है. इसके अलावा तनाव, डिप्रेशन जैसे मेंटल डिसऑर्डर वाले लोगों में भी स्लीप पैरालिसिस के लक्षण देखने को मिलते हैं.
 

स्लीप पैरालिसिस
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शरीर क्यों हिल नहीं पाता- सोने की प्रक्रिया में हम तीन या चार नॉन-आरईएम (rapid eye movement) और एक रैपिड आई मूवमेंट के चरण से गुजरते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इनमें से सपना किसी भी चरण में आ सकता है लेकिन रैपिड आई मूवमेंट वो चरण है जहां सपने बिल्कुल वास्तविक महसूस होने लगते हैं.
 

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स्लीप पैरालिसिस
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स्लीप पैरालिसिस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले शोधकर्ता डैनियल डेनिस ने बताया कि रैपिड आई मूवमेंट के दौरान दिमाग सक्रिय अवस्था में रहता है. आरईएम में लोग खुद को सपने से बाहर लाने के दौरान स्वाभाविक रूप से लकवाग्रस्त हो जाते हैं, इसे आरईएम एटोनिया भी कहा जाता है. ये अवस्था कुछ सेकेंड से लेकर एक मिनट तक रहती है. कुछ दुर्लभ मामलों में ये 10-15 मिनट तक भी रह सकता है.
 

स्लीप पैरालिसिस
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मेडिकल हाइपोथीसिस पत्रिका में छपी एक स्टडी के मुताबिक, शरीर की तंत्रिकाएं मस्तिष्क को हिलने का संकेत देती हैं. ऐसा ना हो पाने की स्थिति में मस्तिष्क मतिभ्रम में चला जाता है. डेनिस का कहना है कि ये मस्तिष्क में अतिसक्रिय अमिगडाला अंग प्रणाली की वजह से भी हो सकता है. अमिगडाला मस्तिष्क को डर या खुशी जैसी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देता है. आरईएम स्लीप के दौरान अमिगडाला सक्रिय अवस्था में रहता है और स्लीप पैरालिसिस के दौरान ये और तेजी से काम करने लगता है.
 

स्लीप पैरालिसिस के लक्षण
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स्लीप पैरालिसिस के लक्षण- 1999 में स्लीप पैरालिसिस पर छपी एक स्टडी के मुताबिक, स्लीप पैरालिसिस मतिभ्रम की तीन मुख्य श्रेणियों से गुजरता है जैसे कि डरावने सपने, अचानक से दिखने वाले सपने और असामान्य शारीरिक अनुभव. इस दौरान ज्यादातर लोग अपनी छाती पर तेज दबाव महसूस करते हैं जिससे ऐसा महसूस होता है कि वो सांस भी नहीं ले पा रहे हैं. इस दौरान ऑक्सीजन की पूरी मात्रा उनके शरीर में रहती है लेकिन बस डर की वजह से उन्हें ऐसा लगता है कि उनकी सांस नहीं आ रही है. 
 

स्लीप पैरालिसिस
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इस दौरान दिमाग में एक तरह का विरोधाभास चलता रहता है. या कुछ यूं कहें कि स्लीप पैरालिसिस के दौरान दिमाग और शरीर के बीच संतुलन नहीं बन पाता है. आप इसको ऐसे समझ सकते हैं कि आपका दिमाग कई सारे लाइट बल्ब की तरह हैं जिनको बंद करने के लिए अलग-अलग ऑन-ऑफ स्विच हैं. वैसे तो दिमाग के सारे स्विच एक साथ बंद हो जाने चाहिए और पूरे दिमाग को एक साथ जगना चाहिए. हालांकि, कई बार दिमाग के कुछ स्विच पहले ऑन हो जाते हैं जबकि कुछ ऑन होने की तैयारी कर रहे होते हैं. नींद में चलने और बोलने की प्रक्रिया भी कुछ इसी तरह होती है. इसमें पूरी तरह जगने से पहले ही आपके कुछ अंग सक्रिय हो जाते हैं.

इन बातों का रखें ध्यान
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इन बातों का रखें ध्यान- स्लीप पैरालिसिस किसी को भी हो सकता है. आमतौर पर ये नींद में कमी या अड़चन, जेट लैग या फिर शिफ्ट में काम करने वालों को महसूस होता है. इसे हाइपरटेंशन, दौरे और नार्कोलेप्सी से भी जोड़कर देखा गया है जहां लोगों की स्लीप साइकिल बिगड़ जाती है और लोग कभी भी कहीं भी सो जाते हैं.
 

स्लीप पैरालिसिस
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अगर आप अक्सर स्लीप पैरालिसिस का अनुभव करते हैं तो पीठ के बल सोने से बचें. स्टडीज के मुताबिक, जो लोग पीठ के बल सोते हैं वो अन्य लोगों की तुलना में स्लीप पैरालिसिस का ज्यादा अनुभव करते हैं. अगर आप स्लीप पैरालिसिस महसूस करते हैं यानी कि जागने के बाद खुद को हिलने-डुलने में असमर्थ पाते हैं, तो अपनी सारी एनर्जी पैर या हाथों की उंगलियों पर लगाएं.
 

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स्लीप पैरालिसिस
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डेनिस का कहना है कि स्लीप पैरालिसिस की अवस्था महसूस होने पर उंगलियों और मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. मांसपेशियों में थोड़ी भी हरकत होने पर स्लीप पैरालिसिस टूट जाता है और आप सामान्य अवस्था में वापस आ जाते हैं.
 

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