इंसान के शरीर का पूरा भार उसके घुटनों पर टिका हुआ है. इसमें हो रही मामूली सी दिक्कत को लगातार नजरअंदाज करना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है. 27 साल की राशेल पिप्लिका इस गलती का नतीजा देख चुकी हैं. राशेल को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका घुटना उन्हें कुछ महीनों या साल के लिए स्केटिंग प्रतिस्पर्धा से बाहर कर देगा.
WebMD के माध्यम से राशेल कहती हैं, 'मैंने अचानक चटकने की एक आवाज सुनी और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा घुटना साइड से मुड़ गया है. वो दर्द इतना बुरा था कि मैं जमीन पर गिर गई और रेंगने लगी. डॉक्टर ने मुझे सलाह दी कि अगर मैंने एक बार और छलांग लगाई तो मैं फिर से अपना घुटना खो दूंगी. उन्होंने मुझे घुटने में ACL इंजरी के बारे में बताया.'
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राशेल ने कहा कि उन्होंने स्केटिंग के पिछले सीजन में भी इसके कुछ वॉर्निंग साइन महसूस किए थे, लेकिन वो उसे लगातार इग्नोर करती रहीं. उन्होंने कहा, 'मुझे पैर में किसी भी वक्त तेज दर्द सताने लगता था. मैं बस बैठकर अपने पैर को सीधा रखती थी. लेकिन इसके बारे में कभी डॉक्टर को नहीं बताया था. मैं सिर्फ यही सोचती रही कि मैं एक स्पोर्ट में हूं जिसमें अक्सर ऐसा होता है.'
राशेल को घुटने में ACL (एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट) की समस्या थी. यह दिक्कत न सिर्फ एथलीट बल्कि किसी भी इंसान को हो सकती है. लिगामेंट, टेंडन्स, कार्टिलेस और मसल से बंधे घुटने में चोट की बड़ी संभावना रहती है. यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया की ऑर्थोपेडिक सर्जन और स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट निकोलस डिनुबाइल के मुताबिक, घुटने के लिगामेंट फट सकते हैं. इसके टेंडन्स में सूजन आ सकती है. ऑस्टियोआर्थराइटिस उभर सकता है. इसलिए घुटने को बचाने के लिए छह बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.
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घुटने में दर्द- हॉस्पिटल फॉर स्पेशल सर्जन (न्यूयॉर्क) के एमडी और स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट जॉर्डन मैजल कहते हैं, 'जब कोई दर्द आपकी क्षमता को सीमित कर देता है तो उसे जांचने के लिए वही करें जो आप आमतौर पर करते हैं. अगर आपकी बॉडी कोई सिग्नल भेज रही तो उसे सुनिए. अगर ये समस्या लगातार रहती है तो आपको चेकअप कराना चाहिए. ऐसे में दर्द को लगातार इग्नोर करना सही नहीं है.'
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ओवरवेट- मोटापे के कारण भी घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है. शरीर का ज्यादा वजन गठिया (आर्थराइिटस) का भी कारण बन सकता है. सीडीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापे की वजह से तीन में से दो लोग घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का शिकार होते हैं. शरीर के वजन का एक पाउंड भी घुटनों पर पांच पाउंड का दबाव डालता है. डाइट और एक्सरसाइज वजन घटाने का अच्छा तरीका है, लेकिन कमजोर घुटनों के साथ एक्सरसाइज से वजन घटाना मुश्किल है.
इंजरी के बाद रखें ज्यादा ध्यान- घुटने की चोट के बाद रेस्ट और रिहेबिलेटेशन पीरियड भविष्य में दर्द या रीइंजरी से बचने के लिए महत्वपूर्ण है. ये घुटनों में डैमेज और इलाज पर निर्भर करता है. ऐसे कई एथलीट पेशेंट हैं जो इंजरी के बाद जल्द से जल्द मैदान पर वापसी करना चाहते हैं. ऐसे लोगों को पहले ऑर्थोपेडिक सर्जन, एथलीट ट्रेनर या फिजिकल थेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए.
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ACL को नजरअंदाज करना- ACL (एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट) घुटनों में होने वाली सबसे कॉमन इंजरी है. अमेरिका में हर साल करीब डेढ़ लाख लोगों को यह इंजरी होती है. सॉकर, बास्केटबॉल, फुटबॉल, वॉलीबॉल या रोलर डर्बी जैसे तमाम खेलों में ऐसी इंजरी होने का खतरा ज्यादा होता है. अचानक किसी मूवमेंट और शरीर में संतुलन ना बन पाने की वजह से भी ऐसी चोट लग सकती है. महिलाओं में इस इंजरी का खतरा पुरुषों की तुलना में दो से आठ गुना ज्यादा होता है.
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एक्सरसाइज के वक्त रखें ध्यान- फिटनेस इम्प्रूव करने के लिए आप ज्यादा हार्डवर्क करते हैं और अपनी बॉडी को रिकवर होने देते हैं. लेकिन आप रोजाना हार्ड वर्क नहीं कर सकते. एक्सरसाइज में अचानक तेजी या रिपीटीशन, बार-बार होने वाले खिंचाव का कारण बन सकता है. इसलिए वर्कआउट के बाद और पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है. जिम में हार्ड वर्क के साथ-साथ हल्की एक्सरसाइज करना भी जरूरी है ताकि आपकी बॉडी रिकवर हो सके.
मांसपेशियों के लिए एक्सरसाइज- कमजोर मांसपेशियां और उसमें फ्लेक्सिब्लिटी की कमी घुटनों में इंजरी का सबसे प्रमुख कारण है. मेयो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नी कैप और कूल्हे की मजबूत मांसपेशियां घुटनों को स्थिर और संतुलित रखती हैं. इन सभी मांसपेशियों का सपोर्ट घुटनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करता है. घुटनों की मजबूती के लिए हैमस्ट्रिंग कर्ल्स, लेग प्रेस और फ्लेक्सिब्लिटी एक्सरसाइज करनी चाहिए.