अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबानी लगातार अपने नए-नए रूप दिखा रहे हैं. तालिबानी युवा बड़े शौक से फोटो खिंचवा रहे हैं और अपनी मौज-मस्ती के वीडियोज बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाल रहे हैं. इन तस्वीरों से युवा तालिबानियों का फैशन की तरफ झुकाव साफतौर पर देखा जा सकता है.
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तालिबानी लड़ाके अपने पारंपरिक कपड़ों से बाहर निकलकर सनग्लासेज, स्टाइलिश जूते और ब्रांडेड बेसबॉल कैप में नजर आ रहे हैं. 1996 से 2001 तक आफगानिस्तान में सत्ता के दौरान तालिबानी अपनी लंबी दाढ़ी, ट्रेडिशनल कपड़े और लंबे बालों के लिए जाने जाते थे लेकिन अब नए लड़ाकों ने अपने रहन-सहन का अंदाज पहले से बदल लिया है. इन्हें 'तालिबान 2.0' भी कहा जा रहा है.
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फैशन के साथ-साथ तालिबान 2.0 के युवा लड़ाके मीडिया में भी बने रहने के शौकीन हैं. पश्चिमी देशों के विरोधी माने जाने वाले तालिबानी वेस्टर्न कपड़े और मॉर्डन लुक अपनाने को आतुर दिखाई दे रहे हैं. हाल ही में काबुल में ली गई कुछ तस्वीरों में इन लड़ाकों को एविएटर सनग्लासेस, बेसबॉलकैप और तालिबानी झंडे के साथ अफगानिस्तान का माल ले जाते हुए देखा गया था.
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यहां तक कि कुछ तालिबानी लड़ाके क्लीन शेव में भी नजर आ रहे हैं जबकि इस्लाम के सख्त कानून में दाढ़ी रखना जरूरी माना जाता है. ये लड़ाके हथियारों के साथ खुलेआम चौकियों और गली के कोनों पर खड़े दिखाई देते हैं. अपनी ताकत दिखाने के लिए ये सड़क के बीचों-बीच लूटपाट भी कर रहे हैं.
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काबुल में हाल ही में ली गई तस्वीरों में तालिबानी रंग-बिरंगे ट्रेडिशनल शलवार कमीज में नजर आए. कई लड़ाके इन कपड़ों के साथ ट्रेंडी बूट्स पहने भी दिखे. जबकि कुछ अपनी पारंपरिक पगड़ी की जगह तालिबान के झंडे से सजी बेसबॉल कैप और स्कार्फ पहने हुए थे. ट्विटर पर तालिबानियों का ये बदला लुक लोगों की चर्चा का विषय बन गया है.
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सोशल मीडिया पर इनके इस मॉडर्न लुक का काफी मजाक बनाया जा रहा है. एक यूजर ने लिखा, 'लगता है कि तालिबान ने अपने लिए एक फैशन डिजाइनर भी रख लिया है. इनमें सुपर विलेन के सारे लक्षण दिखाई दे रहे हैं.' एक अन्य यूजर ने लिखा, 'ये तालिबानी हैं या पेरिस के फैशन कैटवॉक से भाग कर आए लोग हैं. लेटेस्ट तालिबानी फैशन ट्रेंड काफी रोचक है.'
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जहां तालिबानियों में फैशन को लेकर एक बदलाव नजर आ रहा है वहीं, महिलाओं के कपड़ों को लेकर वो अभी उतने ही सख्त हैं. कुछ दिनों पहले एक लड़की की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने टाइट कपड़ पहने थे. वहीं खुले बालों में अफगानिस्तान पर रिपोर्ट तैयार करने पहुंची सीएनएन की पत्रकार क्लेरिसा वॉर्ड दो दिनों के अंदर तालिबानियों के आदेश पर काली शॉल से सिर को ढके हुए नजर आईं. हालांकि, क्लेरिसा ने कहा था कि बाहर रिपोर्टिंग करने के वक्त उनकी पोशाक यही रहती है.
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हालांकि, तालिबान की तरफ से दावा किया जा रहा है कि महिलाओं को लेकर उनका रवैया अब पहले की तरह नहीं है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, '20 साल पहले के तालिबान और अब के बीच बहुत बड़ा अंतर है. अब वैसा नहीं होगा जब महिलाओं को सड़क पर पीटा जाता था या सार्वजनिक रूप से मार दिया जाता था, उन्हें काम, स्वास्थ्य और शिक्षा से मरहूम रखा जाता था.
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हालांकि, तालिबान लाख दावे कर ले उसकी असलियत क्या है ये पूरी दुनिया जानती है. अफगानिस्तान से आ रहे तरह-तरह के वीडियो दिल दहलाने वाले हैं. वहां की महिलाएं और बच्चे डरे हुए हैं कि कब वो इन आतंकियों के गुस्से का शिकार हो जाएं और बदले में उन्हें अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ जाए.
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