वजन घटाने के लिए लोग स्पेशल डाइट से लेकर जिम ट्रेनिंग, कैलोरी बर्न करने वाले सप्लीमेंट्स और तमाम दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो स्लिम-फिट बॉडी की चाहत में 'स्लीव गेस्ट्रेक्टॉमी' नाम की कॉमन बैरिएट्रिक सर्जरी (Weight loss surgery) का सहारा लेने लगे हैं. एक नई स्टडी में इस सर्जरी के भयानक नुकसान सामने आए हैं.
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स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी में इंसान का वजन घटाने के लिए पेट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा हटा दिया जाता है. साइंस डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किशोरों में स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी के जरिए वजन घटाने के मामले साल 2005 से 2014 के बीच 100 गुना ज्यादा हुए हैं. हेल्थ एक्सपर्ट ने दावा किया है कि वजन घटाने के इस तरीके से हड्डियों (Weak bone) पर बुरा असर पड़ता है.
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (बॉस्टन) में रेडियोलॉजी की प्रोफेसर मिरियम ए. ब्रेडैला कहती हैं, 'वजन घटाने वाली इस बैक्टीरियल सर्जरी का इंसान की हड्डियों पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ सकता है.' इस स्टडी में मोटापे से ग्रस्त 52 किशोरों के शरीर की जांच की गई. इनमें से 26 को स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी के अंतर्गत रखा गया था.
करीब एक साल तक किशोरों की हेल्थ को मॉनिटर करने के बाद शोधकर्ताओं ने उनके वजन में 13 से 28 किलोग्राम की कमी दर्ज की. साथ ही उनकी हड्डियों में 'मैरो फैट' ज्यादा पाया गया और लुम्बर स्पाइन में 'लॉस ऑफ बोन डेंसिटी' की समस्या देखी गई.
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डॉ. ब्रेडैला ने बताया कि स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी के बाद हड्डियों में लॉस ऑफ बोन डेंसिटी की आशंका थी, क्योंकि ज्यादा वजन हड्डियों को मजबूत बनाता है. लॉस ऑफ बोन डेंसिटी के अलावा हमारे हार्मोन और शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों पर भी इसका बुरा असर होता है.