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Brown Rice benefits: व्हाइट राइस की जगह क्यों खाएं ब्राउन राइस? डायबिटीज में भी फायदेमंद

भारतीय खाना चावल के बिना अधूरा माना जाता है. इनमें ढेर सारा कार्बोहाइड्रेट और फाइबर पाया जाता है जो सेहत के लिए फायदेमंद होता है. हालांकि, व्हाइट और ब्राउन राइस के अपने-अपने फायदे होते हैं. न्यूट्रिशनिस्ट भुवन रस्तोगी ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में ब्राउन राइस के फायदों के बारे में बताया है.

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ब्राउन राइस खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है
ब्राउन राइस खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जानें कौन सा राइस है अच्छा
  • सेहत के लिए फायदेमंद ब्राउन राइस

चावल में बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर के लिए जरूरी माने जाते हैं. अक्सर इस बात को लेकर लोग दुविधा में रहते हैं कि व्हाइट राइस और ब्राउन राइस में कौन सा ज्यादा बेहतर है. क्या वाकई एक राइस दूसरे से बेहतर है या फिर ये बस एक मिथक है. न्यूट्रिशनिस्ट भुवन रस्तोगी ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में ब्राउन राइस से जुड़े कई दिलचस्प तथ्य शेयर किए हैं और बताया है कि डेली डाइट में इसे शामिल करने के क्या फायदे हैं.

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न्यूट्रिशनिस्ट भुवन ने अपने पोस्ट में समझाते हुए लिखा, 'सभी व्हाइट राइस पॉलिश किए जाने से पहले ब्राउन ही होते हैं. बिना पॉलिश किए गए चावल ही ब्राउन राइस के नाम से बेचे जाते हैं. ब्राउन चावल साबुत अनाज होता है जबकि व्हाइट राइस प्रोसेस्ड होता है. जब चावल के दाने को पॉलिश किया जाता है, तो इससे चोकर और अंकुर का हिस्सा निकाल दिया जाता है. चावल का अंकुरित भाग वो हिस्सा होता है जिसमें खूब सारा मिनरल और चोकर में भरपूर फाइबर होता है. पॉलिश के बाद व्हाइट राइस से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स निकल जाते हैं.'

 

न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि पके हुए सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से ज्यादा और ब्राउन राइस का लगभग 50 है. इसका मतलब है कि व्हाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस ब्लड ग्लुकोज का स्तर ज्यादा नहीं बढ़ाता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए ये बेहतर विकल्प है. हालांकि, फाइबर की कमी पर ध्यान देने की जरूरत है. कई लोग खाने में सिर्फ सफेद चावल खाना पसंद करते हैं जिससे शरीर में फाइबर की जरूरी मात्रा नहीं पहुंच पाती है. न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, हमें अपनी डाइट में कुछ भी ऐसा शामिल नहीं करना चाहिए जिसमें सिर्फ कैलोरी हो और कोई भी पोषक तत्व ना हो.

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अंत में, न्यूट्रिशनिस्ट भुवन ने लिखा, '1900 के दशक की शुरुआत में बेरीबेरी बीमारी ब्राउन राइस की तुलना में बहुत ज्यादा व्हाइट राइस खाने की वजह से फैलना शुरू हुई थी. क्योंकि इसकी वजह से लोगों में विटामिन B1 की कमी हो गई. खासतौर से उन लोगों में जिनका मुख्य भोजन चावल ही होता था. इसलिए व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस को प्राथमिकता देना हेल्थ ट्रेंड नहीं है बल्कि ये एक तरह से अपनी जड़ों में वापस लौटने जैसा है, जहां हम कम प्रोसेस्ड वाला चावल खाते हैं.' 

 

 

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