अमेरिका में करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज का शिकार हैं और लगभग साढ़े नौ करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की चपेट में हैं. फेमस एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. शिरिषा अवधानुला कहती हैं कि टाइप-2 डायबिटीज के मामले में लोगों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि ये शरीर के लिए बहुत घातक साबित हो सकती है. ये ब्लाइंडनेस, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती है. आइए आज आपको बताते हैं कि शरीर में डायबिटीज के कौन से लक्षण सबसे पहले दिखाई देता है.
मोटापा- टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के बीच मजबूत कनेक्शन को लेकर डॉक्टर्स चेतावनी देते हैं. ऐसा नहीं है कि मोटा दिखने वाले हर इंसान को टाइप-2 डाइबिटीज है, लेकिन ऐसे ज्यादातर लोग इस बीमारी का शिकार हैं. एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और ओबेसिटी स्पेशलिस्ट मार्सिया ग्रिबेलर के मुताबिक, मोटापे और डायबिटीज के इस कॉम्बिनेशन को मेडिकल भाषा में 'डाइबेसिटी' कहते हैं. इसलिए मोटापा कम होना डायबिटीज में बहुत फायदेमंद माना जाता है.
भूख-प्यास बढ़ना- इंसान की भूख-प्यास को देखकर भी टाइप-2 डायबिटीज का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसमें लगातार पानी पीने के बावजूद लोग डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि डायबिटीज में हमारा शरीर खून को पतला करने और हाई ग्लूकोज को डाइल्यूट करने के लिए ऊतकों से तरल पदार्थ खींचता है. दूसरा, खाने के बाद आपको फिर से भूख सता सकती है. ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि खाने से आपकी मांसपेशियों को एनर्जी मिलनी चाहिए, वो नहीं मिल पाती है. दरअसल आपके शरीर का इंसुलिन रेजिस्टेंस ग्लूकोज को मांसपेशियों में जाने से रोकता है. इसलिए मांसपेशियां और ऊतक एनर्जी पाने के लिए भूख के रूप में ये मैसेज भेजते हैं.
यूरीनेशन बढ़ना- ओवर यूरीनेशन यानी ज्यादा पेशाब आना भी डायबिटीज का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त ब्लड शुगर के अणु यूरीन में फैल जाते हैं. इसका मतलब हुआ कि जब किडनी ब्लड को फिल्टर करती है तो उसमें शुगर पूरी तरह अवशोषित ना होकर बाहर आ जाती है. यूरीन में ज्यादा शुगर होने की वजह से ही डायबिटीज मरीजों को बार-बार या ज्यादा पेशाब आता है.
आंखों में धुंधलापन- डॉक्टर कहते हैं कि आंखों से धुंधला दिखाई देना भी डायबिटीज का एक लक्षण हो सकता है. ओफ्थामोलॉजिस्ट जूली रोजेंथल कहती हैं, 'शुरुआत में शायद आंखों की रोशनी पर असर ना दिखाई दे. लेकिन आगे चलकर किसी स्टेज पर आंखों के मैक्युला में सूजन बढ़ने से इंसान को धुंधला दिखाई दे सकता है. इसे मैक्युलर एडिमा कहा जाता है.'
एक्सपर्ट के मुताबिक, मैक्युला आंखों का एक ऐसा प्वॉइंट है जिसकी मदद से आप किसी चेहरे को देख पाते है. पढ़ पाते हैं. किसी चीज की पहचान कर पाते हैं. शुरुआती स्टेज पर अक्सर इंसान को इसमें समस्या महसूस नहीं होती है. इसलिए डॉक्टर लगातार आंखों की जांच कराने की सलाह देते हैं. अगर हम शुरुआती स्टेज पर ही इसकी पहचान कर लें तो आगे चलकर 'ब्लर विजन' या 'विजन लॉस' जैसी दिक्कतों से बचा जा सकता है.