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ये दिक्कतें होने पर समझ जाएं कि खतरनाक लेवल पर है ब्लड शुगर, डायबिटीज मरीज तुरंत हो जाएं अलर्ट

Diabetes Control Tips: डायबिटीज की बीमारी में मरीज को हर समय अपने ब्लड शुगर लेवल पर नजर बनाकर रखनी चाहिए. ब्लड शुगर का बहुत ज्यादा घटना और बढ़ना दोनों ही खतरनाक हैं. इसके बढ़ने पर नींद में दिक्कत, बहुत प्यास लगना, धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण शामिल हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिस पर काबू पाने के लिए मरीज को अपनी डेली लाइफस्टाइल और खानपान पर काबू पाने की जरूरत होती है. इस बीमारी में अगर मरीज खानपान का ध्यान नहीं रखता है तो उसका ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. ब्लड शुगर का ज्यादा बढ़ना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. ब्लड शुगर बढ़ने पर आपका शरीर आपको कई संकेत देता है. बहुत अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, नजरों का कमजोर होना और बिना किसी कारण के वजन घटना भी ब्लड शुगर के हाई होने के लक्षण हैं.

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इसके अलावा, अनियंत्रित रक्त शर्करा शरीर की छोटी ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिका) को भी नुकसान पहुंचा सकती है जिससे अंगों तक ब्लड की सप्लाई मुश्किल हो जाती है. यह बीमारी गंभीर रूप धारण करने पर इंसान के लिए जानलेवा हो सकती है. इसलिए डायबिटिक मरीजों को खासतौर पर शरीर के इन अंगों में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए.

आमतौर पर 140 mg/dL (7.8 mmol/L) से कम रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर सामान्य माना जाता है. अगर यह 200 mg/dL से ऊपर है तो इसका मतलब है कि आपका शुगर बढ़ा हुआ है. लेकिन अगर यह 300 mg/dL से ऊपर चला जाए तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है. ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

आंखों में ये बदलाव डायबिटीज की निशानी
रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर आंखों की रेटिना की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है जिससे आंखों से संबंधित समस्याएं जैसे नजर कमजोर होना, धुंधला होना, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और सबसे अधिक संबंधित डायबिटिक रेटिनोपैथी होती है. रेटिनोपैथी का मतलब रेटिना की बीमारी से है जो आंख के पीछे परत होती है. इसे अगर बिना इलाज के ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो इससे डायबिटीज के मरीजों की आंखों की रोशनी भी जा सकती है और वो अंधे तक हो सकते हैं.

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पैर में होने वाले इन लक्षणों पर ध्यान दें

डायबिटीज आपके पैरों को दो तरह से प्रभावित कर सकती है जिसमें पहला नर्व डैमेज (तंत्रिका क्षति) और दूसरा ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) में खराबी शामिल है. तंत्रिका क्षति होने पर आपका पैर किसी भी प्रकार की सनसनी महसूस नहीं कर पाता है. दूसरी स्थिति में आप अपने पैरों तक ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता जिससे किसी भी संक्रमण को ठीक करना मुश्किल हो जाता है. समय के साथ अगर उन घावों या संक्रमण का इलाज नहीं किया जाता है तो आप उन अंगों को खो सकते हैं.

किडनी पर बुरा असर डालती है डायबिटीज

गुर्दे शरीर का एक अभिन्न अंग हैं जो शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों और वेस्ट मटीरियरल को छानने में मदद करते हैं. इसमें छोटी रक्त वाहिकाएं होती हैं जो अंग को कुशलतापूर्वक कार्य करने में मदद करती हैं. लेकिन हाई ब्लड शुगर इन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे आगे चलकर डायबिटिक किडनी डिसीस हो सकती है. इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी भी कहा जाता है. इसमें व्यक्ति को बार-बार यूरीन आना, रक्तचाप में गड़बड़ी, पैरों, टखनों, हाथों और आंखों में सूजन, मतली, उल्टी, थकान जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं.

नर्व पर डायबिटीज का होता है ये असर

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डायबिटिक रेटिनोपैथी और नेफ्रोपैथी की तरह हाई ब्लड शुगर से भी तंत्रिका क्षति हो सकती है जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति के शरीर में सुन्नता आ जाती है और दर्द, तापमान, जलन, ऐंठन और स्पर्श महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है. इसके अलावा व्यक्ति के पैरों में अल्सर और संक्रमण जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं.

दिल और ब्लड वेसल्स पर भी पड़ता है असर
डायबिटीज की बीमारी चूंकि ब्लड शुगर बढ़ाती है जो ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिका) के नुकसान का कारण बन सकता है. इस वजह से डायबिटीज के रोगी को हमेशा स्ट्रोक और हृदय रोग सहित कई बीमारियों का खतरा रहता है. इसके अलावा यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, डायबिटीज के रोगियों में कई बीमारियां होने का जोखिम होता है जो उच्च रक्तचाप सहित हृदय रोग का खतरा बढ़ाती हैं.

मसूड़े का रोग

मसूड़ों की बीमारी उच्च रक्त शर्करा से जुड़ी एक सामान्य स्थिति है जिसे पेरियोडोंटल डिसीस भी कहा जाता है. यह आमतौर पर रक्त वाहिकाओं के बंद या मोटा हो जाने की वजह से होती है जो मसूड़ों में रक्त के प्रवाह को कम कर देती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इसके अलावा हाई ब्लड शुगर मुंह में बैक्टीरिया के विकास को भी बढ़ावा दे सकता है जो आमतौर पर मसूड़ों की बीमारी का कारण बनता है. इसके लक्षणों में मसूड़े से रक्तस्राव होना, उनका संवेदनशील हो जाना और मसूड़ों में दर्द शामिल हैं.

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