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दुनिया की एक बड़ी आबादी को बांझ बना सकता है ये खतरनाक सुपरबग, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी

एम जेनिटेलियम नाम का ये बैक्टीरिया ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण प्रकट नहीं करता है और ये लोगों के अंदर कई सालों तक रह सकता है. लेकिन ये अन्य सैक्शुअली ट्रांसमिटिड डिसीस की तुलना में अधिक खतरनाक है. इसका ट्रीटमेंट इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि ये दवाओं के प्रति रसिस्टेंस डेवलप कर लेता है. ये महिलाओं में गर्भाशय से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के साथ ही इनफर्टिलिटी भी पैदा कर सकता है.

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अमेरिका में लोगों के बीच तेजी से फैल रहे एक सुपरबग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. ये सुपरबग इंसानों में सैक्शुअली ट्रांसमिटिड डिसीस (STI) पैदा करता है जिससे लोग इनफर्टिलिटी का शिकार हो सकते हैं. सुपरबग सामान्य तौर पर बैक्टीरिया का ही रूप होते हैं लेकिन कुछ स्वभाव में ज्यादा हानिकारक नहीं होते और कुछ बेहद खतरनाक होते हैं. इस सुपरबग (बैक्टीरिया) का नाम माइकोप्लासमा जेनिटेलियम (M.Genetalium) है. ये इतना खतरनाक है कि अब तक इसके इलाज के लिए जिस भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है, ये उन सभी के प्रति रसिस्टेंस डेवलप कर लेता है. इस वजह से इलाज डॉक्टरों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

ये बैक्टीरिया पहली बार 1980 में लंदन में खोजा गया था लेकिन इस बीमारी का पता लगाने के लिए पहली बार 2019 में अमेरिका में इसके लिए परीक्षण की शुरुआत की गई. ये टेस्ट फिलहाल अमेरिका तक ही सीमित है. इसका मतलब है कि वैज्ञानिक भी इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि इस बैक्टीरिया का प्रसार दुनिया के किन-किन देशों तक हो चुका है.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक
कुछ रिसर्च में हालांकि अमेरिका में 100 में एक व्यक्ति M.Genetalium से संक्रमित पाया गया. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों में इसका प्रसार काफी ज्यादा है. ये संक्रमण बांझपन, प्रीमैच्योर बर्थ, गर्भपात, गर्भाशय की सूजन और इससे जुड़ी कई बीमारियों का खतरा पैदा करता है.

वैज्ञानिक इस बात ये अधिक परेशान हैं कि ये बैक्टीरिया सैक्शुअली ट्रांसमिटिड डिसीस के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली एज़िथ्रोमाइसिन, क्विनोलोन, मैक्रोलाइड और डॉक्सीसाइक्लिन दवाओं के प्रति रेसिस्टेंस पैदा कर रहा है जिस वजह से इसका इलाज मुश्किल हो सकता है. 

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वैज्ञानिकों ने कहा कि इलाज के अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं लेकिन उनके साइडइफेक्ट भी हैं जिनका इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं के लिए तो बिलकुल भी नहीं किया जा सकता. यहां तक कि ये बैक्टीरिया उन दवाओं के सामने भी आसानी से सर्वाइव रहा है.

सुपरबग से होने वाली बीमारियों के कारण हर साल दुनिया में 70 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे ग्लोबल वार्मिंग की तरह ही बेहद गंभीरता से लेने की जरूरत है.

बिना संकेत दिए धीरे-धीरे करता है बीमार
एम जेन ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण प्रकट नहीं करता है और ये लोगों के अंदर कई सालों तक रह सकता है. लेकिन ये अन्य सैक्शुअली ट्रांसमिटिड डिसीस की तुलना में अधिक खतरनाक है. इसका ट्रीटमेंट इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि इसके लक्षण तुरंत नजर नहीं आते हैं. एम. जेन से रिप्रोडक्टिव पार्ट्स में ब्लीडिंग, सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है. साथ ही ये महिलाओं में बांझपन का भी कारण बन सकता है. 

क्या ये इंसानों से इंसानों में फैलता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि महिला और पुरुष के बीच संबंध बनाने के दौरान इसका ट्रांसमिशन हो सकता है और ये जन्म से पहले मां से बच्चे के अंदर भी जा सकता है. 

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सुपरबग से होती हैं ये बीमारियां 

साल 2021 में अमेरिका में हुई 10 से ज्यादा रिसर्च में ये पाया गया कि इस सुपरबग की वजह से प्रीमैच्योर बर्थ का जोखिम बढ़ता है. वहीं, पुरुषों में इस इंफेक्शन की वजह से यूरीन से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं . इससे महिला और पुरुष दोनों में असामान्य डिस्चार्ज की समस्या भी हो सकती है. हालांकि इससे इंसानों में लंबे समय तक होने वाले दुष्प्रभावों पर अभी और रिसर्च की जा रही है. 


 

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