विटामिन डी शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है. इसकी कमी का मतलब है कि आपके शरीर में इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा नहीं है. आपको अपनी हड्डियों को विकसित करने और उनकी हेल्थ को बनाए रखने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है. अगर आपकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती है आपको कोई मेडिकल इश्यू है जो आपके शरीर की इसे अवशोषित करने की क्षमता को कम करता है. या फिर आप अपने आहार में इसे पर्याप्त मात्रा में नहीं लेते हैं तो आपके शरीर में विटामिन डी की कमी का खतरा बढ़ सकता है.
Cleveland clinic के अनुसार, विटामिन डी उन कई विटामिनों में से एक है जिनकी आपके शरीर को स्वस्थ रहने के लिए जरूरत होती है. यह आपके खून और हड्डियों में कैल्शियम के संतुलन को बनाए रखने और हड्डियों के निर्माण और रखरखाव में अहम भूमिका निभाता है.
विटामिन डी की कमी के लक्षण
आपको बता दें कि वयस्कों में विटामिन डी की कमी कई बार पता नहीं चलती है. हालांकि कुछ लक्षण इसकी कमी के संकेत हो सकते हैं. इनमें थकान, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन, मूड में बदलाव जैसे कि डिप्रेशन शामिल हैं.
बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण और संकेत
बच्चों में विटामिन डी की गंभीर कमी से रिकेट्स की बीमारी हो सकती है. रिकेट्स होने पर बच्चों की हड्डियां झुकी हुई या मुड़ी हुई होती हैं जिनसे उनका विकास ठीक से नहीं हो पाता. मांसपेशियों में कमजोरी, हड्डियों में दर्द भी इसके संकेत हैं.
शरीर में कैसे बढ़ाएं विटामिन डी
सूरज की रोशनी से शरीर में विटामिन डी बनता है. आपकी त्वचा पर सूर्य के प्रकाश का संपर्क ही सबसे बढ़िया सोर्स है (हालांकि गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों और वृद्ध लोगों को सूर्य के प्रकाश के माध्यम से पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल सकता है. इसके अलावा आपकी भौगोलिक स्थिति भी सूरज की रोशनी से मिलने वाले पर्याप्त विटामिन डी को रोक सकती है. इसके अलावा पोषक तत्वों से भरपूर बढ़िया डाइट और सप्लिमेंट्स के जरिए विटामिन डी की कमी को दूर किया जा सकता है.
विटामिन की कमी से जुड़ी हैं ये मेडिकल कंडीशन्स
1-सिस्टिक फाइब्रोसिस, क्रोहन रोग और सीलिएक रोग विटामिन डी की कमी से संबंधित हैं क्योंकि कंडीशन्स आपके इंटेस्टटाइन को सप्लिमेंट के माध्यम से पर्याप्त विटामिन डी को अवशोषित करने से रोक सकती हैं.
2- किसी भी व्यक्ति का 30 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स विटामिन डी की कमी से जुड़ा हो सकता है. फैट सेल्स विटामिन डी को अलग रखती हैं ताकि यह रिलीज न हो. मोटापे में शरीर में विटामिन डी के सामान्य स्तर को मेंटेन रखने लिए विटामिन डी सप्लीमेंट की ज्यादा खुराक लेने की जरूरत होती है.
3- किडनी और लिवर डिसीस कुछ एंजाइमों (आपके लिवर से लिवर एंजाइम 25-हाइड्रॉक्सिलेज और आपकी किडनी से 1-अल्फा-हाइड्रॉक्सिलेज) की मात्रा को कम करती हैं जो आपके शरीर को विटामिन डी को उस रूप में बदलने के लिए जरूरी हैं जिसका वह उपयोग कर सकता है. इनमें से किसी भी एंजाइम की कमी से आपके शरीर में एक्टिव विटामिन डी कम हो सकता है.