छींक आना एक आम समस्या है जिसका सामना लगभग हर किसी को करना पड़ता है. आमतौर पर दिनभर में 3 से 4 बार छींक आना कॉमन माना जाता है. लेकिन अगर इससे ज्यादा बार छींक आती है तो आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. छींक आने से हमारी नाक में स्थित केमिकल्स, डस्ट और कीटाणु बाहर निकल जाते हैं. आपने कई बार यह नोटिस किया होगा कि रात में सोते समय छींक नहीं आती है. क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि ऐसा क्यों होता है?
स्लीपिंग ओशन में एक मेडिकल राइटर डॉ. पो-चांग ह्सू ने कहा, जब आप सो रहे होते हैं तो आपका दिमाग शरीर के रिफेक्स रिस्पॉन्सिस (प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया) जैसे छींकना और खांसने को बंद कर देता है. तो जब आपके शरीर को छींकना होता है तो वह जाग जाता है.
क्यों नींद में नहीं आती आपको छींक?
आपका शरीर छींक को दो अलग तरीकों से रोकता है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप नींद के कौन से फेस में हैं.
नींद को दो फेज में बांटा जाता है- नॉन रैपिड आई मूवमेंट स्लीप (NREM) यानी नींद का शुरुआती चरण और रैपिड आई मूवमेंट (REM) स्लीप, यह नींद का वो फेज होता है जिसमें आप सपने देखते हैं.पूरी रात आपकी नींद इन दो फेज में ही घूमती रहती है.
NREM स्लीप के दौरान क्या होता है?
NREM स्लीप के के तीन स्टेज हैं-
स्टेज 1- इसे सबसे हल्की स्लीप स्टेज माना जाता है जो एक से 5 मिनट तक रहती है.
स्टेज 2- इस स्टेज में, जैसे-जैसे आप गहरी नींद में जाते हैं आपका हार्ट रेट और बॉडी टेंप्रेचर कम होने लगता है. इस स्टेज की पहली साइकिल 25 मिनट तक की होती है, फिर इसके बाद की साइकिल ज्यादा समय तक रहती है.
स्टेज 3- इसे नींद की सबसे गहरी स्टेज माना जाता है. इस स्टेज में व्यक्ति काफी गहरी नींद में सोता है और इस दौरान उठना काफी मुश्किल होता है. इस स्टेज में सो रहे व्यक्ति को अगर अपने आप आंख खुलने से पहले कोई उठाता है तो घबराहट महसूस होने लगती है.
NREM स्लीप के दौरान, आपके शरीर का रिफेक्स सिस्टम काम करता रहता है, लेकिन यह इस दौरान काफी कम सेंसेटिव होता है. यही कारण है कि कभी-कभी आप तेज आवाज में भी गहरी नींद में सो जाते हैं.
उसी तरह, चीजें जो सामान्य रूप से छींक को ट्रिगर कर सकती हैं, जैसे हवा में धूल या पराग के कण NREM स्लीप के दौरान आपके दिमाग का ध्यान आकर्षित नहीं कर पाते.
हालांकि, आप NREM स्लीप की पहली स्टेज में छींकने के लिए जाग सकते हैं अगर आपकी छींक बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग है तो. लेकिन अगर आप गहरी नींद में सो रहे हैं तो आपको छींक नहीं आएगी.
REM स्लीप के दौरान क्या होता है?
आप REM स्लीप के दौरान छींक नहीं सकते क्योंकि जब आप सपने देखते हैं तो मोटर एटोनिया नाम की एक स्थिति आपके शरीर को पैरालाइज्ड कर देती है. आपके सपनों में क्या हो रहा है, ये जानने से रोकने के लिए आपका दिमाग आपके शरीर की एक्ट करने की क्षमता को रोक देता है.
छींकने के लिए कई मांसपेशियों के तालमेल की जरूरत होती है , और जब आपका दिमाग आपको मोटर एटोनिया की स्थिति में पहुंचाता है, तो आपकी मांसपेशियां काम नहीं कर पातीं, इन्हीं सब कारणों की वजह से REM स्लीप के दौरान छींक आना असंभव होता है.
किन कारणों की वजह से आती है रात में छींक?
आमतौर पर छींक तब आती है जब आपकी नाक में धूल, मिट्टी या फूलों के कण प्रवेश करते हैं. अगर आपको रात के समय छींक आती है तो इसके पीछे 2 वजहें हो सकती हैं.
पहली, लेटने पर नाक के रास्ते में ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है. जिसके रिजल्ट में म्यूकस का उत्पादन ज्यादा होता है, जिसके चलते छींक आने के चांसेस काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं.
दूसरा कारण आप किस वातावरण में सोते हैं, यह भी है. अगर आप ऐसे कमरे में है जहां एलर्जी बढ़ाने वाले कारण मौजूद हैं तो भी आपको छींक आने की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके लिए जिम्मेदार चीजों में शामिल हैं-
- जानवरों से एलर्जी
- फूल के कणों के कारण
- धूल
रात में आने वाली छींक से कैसे निपटें
रात में सोने पहले अपने बेडरूम की सभी खिड़कियों को बंद कर लें, खासकर उन दिनों में जब फूल के कण काफी ज्यादा उड़ते हैं.
हफ्ते में एक बार अपनी बेडशीट को जरूर बदलें. जबकि अपने तकिये के कवर को हर 2 दिन में जरूर बदलें. इसके साथ ही अपने बिस्तर को साफ रखें.
अगर आपको जानवरों से एलर्जी है तो जरूरी है कि आप उन्हें अपने बिस्तर पर ना आने दें.
अपने बेडरूम के फर्श की रोजाना सफाई और डस्टिंग करें. कोशिश करें कि आपके बेडरूम में धूल ना जम पाए.
सोने से पहले अगर आप नहाते हैं तो इससे आपके शरीर में धूल नहीं चिपकती जिससे आपको छींक नहीं आती साथ ही सोने से पहले नहाने से आपको नींद भी अच्छी आती है.