World obesity day 2022: 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस है. दुनिया भर में मोटापा एक महामारी की तरह फैल चुका है. WHO कहता है कि दुनिया में लगभग 39 प्रतिशत युवा मोटापे का शिकार हैं या उनमें मोटापे की अधिक संभावना है. मोटापा या वजन कम करने के लिए लोग एक्सरसाइज से लेकर कई घरेलू तरीके भी अपनाते हैं. वहीं कुछ लोग तो खाना-पीना तक छोड़ देते हैं, जो कि वजन कम करने का गलत तरीका होता है. कोरोना महामारी के बाद से लोगों में फिटनेस को लेकर अवेयरनेस और भी अधिक बढ़ गई है. आजकल कई सारे लोग फिट तो होना चाहते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने या फिर अधूरी जानकारी के कारण उन लोगों का मोटापा कम नहीं हो पाता.
भारत में लोगों के मोटे होने और वजन कम न होने का कारण जानने के लिए हमने लूज फैट, गेट फिटर बुक (Lose Fat, Get FITTR) के राइटर जितेन्द्र चौकसे से बात की. उन्होंने भारत में मोटापे के बढ़ते हुए आंकड़े, वजन कम न हो पाने का कारण और बिजी शेड्यूल वाले लोग वजन कम करने के लिए कौन सा आसान तरीका अपना सकते हैं, इस बारे में बताया. अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो बिजी शेड्यूल के कारण वजन कम नहीं कर पा रहे हैं, तो यह आर्टिकल जरूर पढ़ें.
भारत में मोटापे का आंकड़ा
जितेन्द्र चौकसे बताते हैं, अगर भारत की बात की जाए तो हर इंडिया में हर तीसरा इंसान मोटापे की श्रेणी में आता है. वहीं अगर बच्चों की बात की जाए तो लगभग 4 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार हैं. एडल्ट के साथ-साथ मोटापा बच्चों में भी तेजी से फैल रहा है, जो काफी खतरनाक स्थिति है.
जो लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं, उन्हें हार्ट संबंधित समस्याएं, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो रही हैं. इंडिया डायबिटीज के मामलों में नंबर एक हो गया है और कार्डियो वैस्कुलर डिजीज में इंडिया नंबर तीन पर है. देश में हर साल करीब 20 लाख लोगों की मौत कार्डियो वैस्कुलर डिजीज के कारण होती है. लोगों को ये समझना होगा कि मोटापा इंसान की लाइफस्टाइल, सोशल लाइफ, मेंटल स्थिति आदि को प्रभावित करती है, इसलिए फिट और हेल्दी रहना काफी जरूरी है. अगर कोई इंसान फिट होना चाहता है, तो थोड़ी मेहनत करके आसानी से फिट हुआ जा सकता है.
भारत में मोटापे का कारण
जितेन्द्र बताते हैं, मुझे लगता है भारत में मोटापा के कुछ बेसिक कारण हैं. पहला कारण है कि भारतीय व्यंजन काफी स्वादिष्ट होते हैं, जिस कारण लोग अधिक खा लेते हैं. वहीं, इसके अलावा हमारा जो कल्चर है, वह शुरू से ही मोटापे को प्रोत्साहित करने वाला है. बचपन में जब कोई दुबला-पतला होता है, तो उसके लिए बोला जाता है कि बच्चा काफी कमजोर है, उसे खिलाओ-पिलाओ.
हमारे यहां का कल्चर, स्पोर्ट्स कल्चर नहीं है. अगर ऑस्ट्रेलिया या ईस्ट कंट्रीज की बात की जाए तो वहां बचपन से ही बच्चों को स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिस कारण से वहां मोटापा काफी न के बराबर होता है. कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां बच्चों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग अनिवार्य होती है. अब इन सबके मुकाबले भारत की बात की जाए तो फिटनेस कल्चर इंडिया में 1960 के बाद से खत्म हो चुका था. लेकिन अब समय के साथ-साथ लोगों में फिटनेस को लेकर थोड़ी अवेयरनेस देखने मिल रही है.
बिजी लाइफ वाले ऐसे रहें फिट
जो लोग ऑफिस जाते हैं और समय न मिल पाने के कारण पैकेज्ड फूड या स्नैक्स का सेवन करते हैं, उनकी फिटनेस पर बात करते हुए जितेन्द्र कहते हैं, फिटनेस को लेकर लोगों के पास कई बहाने होते हैं. अगर कोई कहता है कि ऑफिस के कारण एक्सरसाइज करने का टाइम नहीं है, मैं एक्सरसाइज नहीं कर सकता, डाइट नहीं कर सकता, मैं हेल्दी पैकेज्ड फूड खाता हूं आदि. ये सिर्फ अपने आपको संतुष्ट करने के लिए बहाने होते हैं.
जैसे कोई जॉब करके पैसे अपने लिए कमाता है, उसी तरह अगर कोई एक्सरसाइज करते फिट होता है, तो वह अच्छी सेहत भी अपने लिए ही कमाता है. जब कोई बिना बहाने पैसा कमाने के लिए टाइम निकाल सकता है, तो वही व्यक्ति अपनी हेल्थ के लिए समय क्यों नहीं निकाल सकता?
ऑफिस जाने वाले ऐसे निकालें समय
जितेन्द्र बताते हैं, जो लोग कहते हैं कि मेरे लिए एक्सरसाइज के लिए समय नहीं है या फिर मैं समय नहीं निकाल पाता हूं, उन्हें अपना टाइम मैनेजमेंट करना होगा. उदाहरण के लिए अगर कोई अलमारी है और उसमें कपड़े बिना प्रेस किए रख दिए जाएं तो उसमें सामान भी कम आएगा और अच्छी भी नहीं लगेगी. अगर अलमारी में अधिक सामान रखना है, तो कपड़ों को फोल्ड करके अच्छी तरह रखें, इससे अलमारी में जगह भी बच जाएगी, सामान भी जमा हुआ लगेगा.
आप अपनी लाइफ भी अलमारी की तरह ही बनाएं. हर चीज को सिस्टमेटिक तरीके से रखें. हर चीज के लिए टाइम फिक्स करें, कि कितने बजे उठना है, कितने बजे सोना है, कितने बजे ऑफिस जाना है आदि. अगर आप ऐसा करते हैं, तो समझ पाएंगे कि आपकी लाइफ में काफी समय बच गया है. बस उस बचे हुए समय को अपनी सेहत सही करने में लगाएं.
ऑफिस जाने वाले ऐसे करें शुरुआत
जितेन्द्र कहते हैं, वर्कफ्रॉम होम के कारण कई लोगों में मोटापा अधिक देखा जा रहा है. अब जो लोग ऑफिस या कॉलेज जाते हैं, उन लोगों को बस थोड़ी सी मेहनत की जरूरत होगी और अगर आप मन में ठान लेंगे तो काफी आसानी से वजन कम कर लेंगे.
वजन कम करने के लिए सबसे पहले सही जानकारी होना जरूरी है. गूगल पर हर सवाल का जवाब है, बस आपके मन में सवाल होना चाहिए. फिटनेस की ओर पहला कदम बढ़ाने के लिए अपना बीएमआई और मेंटनेंस कैलोरी चैक करें. बीएमआई से आपको आपने शरीर का लेवल पता लगेगा कि आप मोटापे की किस श्रेणी में हैं. मेंटनेंस कैलोरी से ये पता लगेगा कि वजन को स्थिर रखने के लिए आपको कितनी कैलोरी की जरूरत होती है. अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो मेंटनेंस कैलोरी से 200-300 कैलोरी कम खाएं.
वजन कम करने का सबसे पहला नियम यही है कि कैलोरी डेफिसिट में रहना होगा. दूसरा रूल ये है कि शरीर को मूव कराना होगा यानी किसी न किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करनी होगी. मैं यह नहीं कहता कि जिम में जाकर एक्सरसाइज करो. मैं यह कह रहा हूं कि शरीर से काम कराते रहें, ताकि कैलोरी बर्न होती रहे और बॉडी एक्टिव बनी रहे. कम खाएं और शरीर से अधिक मेहनत कराएं.
मेहनत करने का मतलब घर के कोई काम कर सकते हैं, ऑफिस में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का प्रयोग कर सकते हैं, गाड़ी की अपेक्षा पैदल चलने पर जो दे सकते हैं. ये छोटे-छोटे बदलाव ही वजन कम करने में काफी मदद करते हैं. लेकिन आज के समय फास्ट फूड, पैकेज्ड फूड के अधिक सेवन और सुस्त लाइफस्टाइल ने लोगों की फिटनेस को खराब कर दिया है.
इसके साथ ही पर्याप्त नींद, कम तनाव, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से आसानी से वजन कम किया जा सकता है. इसके साथ ही इस बात का खास ख्याल रखें कि वजन रातों रात कम नहीं होता. जिस तरह वजन धीरे-धीरे बढ़ता है, उसी तरह वजन धीरे-धीरे ही कम होता है.