बच्चे को शहद तो नहीं चटाते आप? हो सकती है ये गंभीर बीमारी
मंजू ममगाईं/aajtak.in
29 मार्च 2019,
अपडेटेड 4:27 PM IST
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आपने आज तक शहद खाने के कई फायदे सुने होंगे, त्वचा को खूबसूरत बनाने से लेकर बालों की सेहत तक शहद किसी वरदान से कम नहीं है. लेकिन ये वरदान आपके बच्चे की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. जी हां ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि एक वर्ष से छोटी आयु के बच्चों को शहद नहीं खिलाना चाहिए. शहद में क्लोस्ट्रिडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया मौजूद होता है. शहद का सेवन बच्चों को करवाने से आपका बच्चा 'इंफेंट बोटुलिज्म' नामक एक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो सकता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है यह बीमारी, इसके लक्षण और बचाव का तरीका.
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क्या है इंफेंट बोटुलिज्म इंफेंट बोटुलिज्म एक जानलेवा बीमारी है जिसमें क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया शिशु के पेट के अंदर बढ़ने लगता है. यह ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों (जैसे शहद और कुछ मकई के सिरप) के अवाला दूषित मिट्टी, धूल और खुले घाव में पाए जा सकते हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो बच्चा मिर्गी, सांस की बीमारी के अलावा अपनी जान तक गवां सकता है.
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किस उम्र के शिशु को नहीं देना चाहिए शहद इंफेंट बोटुलिज्म का सबसे ज्यादा खतरा 6 सप्ताह से लेकर 6 महीने तक की उम्र के बीच वाले शिशुओं को होता है. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक यह शिशुओं में शुरुआती 6 दिन से लेकर 1 साल तक की उम्र में पाया जा सकता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि जब तक शिशु एक साल का न हो जाए, उसे शहद नहीं देना चाहिए.
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इंफेंट बोटुलिज्म 3 तरह का होता है-
-इंफेंट बोटुलिज्म
(बच्चों में होने वाला बोटुलिज्म)
-फूडबोर्न बोटुलिज्म
( खाद्य पदार्थों के माध्यम से फैलने वाला बोटुलिज्म)
-वूंड बोटुलिज्म
(किसी घाव के माध्यम से फैलने वाला बोटुलिज्म )
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इलाज बच्चे का रक्त, मल या उलटी को जांचने के बाद डॉक्टर बच्चे के शरीर में इस रसासन की उपस्थिति का पता लगा सकते हैं.
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बोटुलिज्म का वयस्कों पर क्यों नहीं पड़ता असर
इस खबर को पढ़ने के बाद आपके मन में यह सवाल भी आ सकता है कि शहद का सेवन अगर शिशुओं के लिए गलत है तो वही शहद व्यस्कों के लिए अच्छा कैसे हो सकता है. तो आपको बता दें, इस सवाल में ही इसका जवाब छिपा हुआ है.
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जी हां, आप शहद का सेवन इसलिए कर सकते हैं क्योंकि आप शिशु नहीं है. दरअसल
क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम आंत में प्रवेश करते ही जीवित हो जाता है और एक
तरह का टॉक्सिन उत्पन्न करता है. यह उसी तरह का टॉक्सिन होता है जो बोटॉक्स
में भी इस्तेमाल किया जात है. हालांकि बोटॉक्स में पाया जाने वाले टॉक्सिन
की मात्रा इसकी तुलना में बहुत कम होती है.
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बता दें, यदि यह टॉक्सिन
बड़ी मात्रा में शरीर में मौजूद हो तो ये व्यक्ति के तंत्रिका
तंत्र पर हमला करके उसे लकवे का शिकार बना सकता है. इतना ही नहीं इसकी वजह
से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.
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कोई भी वयस्क या एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चा क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम से इसलिए प्रभावित नहीं होता
क्योंकि समय के साथ उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति का विकास हो जाता है जो
इन जीवाणुओं के अंकुरण और विकास को रोकने में मदद करती है.