कोरोना वायरस का खौफ वुहान शहर से निकलकर दिल्ली तक पहुंच गया है. सोमवार को भारत में कोरोना वायरस के दो नए केस दर्ज किए गए हैं. ये दोनों मामले दिल्ली और तेलंगाना में सामने आए हैं. चीन में अब तक करीब 3000 लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले कोरोना वायरस को लेकर लोग सोशल मीडिया पर एक नॉवेल का प्रिंट शॉट वायरल कर रहे हैं.
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इस नॉवेल को लेकर दावा किया जा रहा है कि 40 साल पहले ही इस किताब में कोरोना वायरस का जिक्र हो चुका था. लोगों का कहना है कि 40 साल पहले लेखक ने अपनी किताब में कोरोना वायरस की भविष्यवाणी की थी.
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इस किताब का नाम 'द आइज ऑफ डार्कनेस' बताया जा रहा है. ये किताब साल 1981 में डीन कोन्टोज नाम के लेखक ने लिखी थी. एक थ्रिलर नॉवेल के रूप में ये काफी लोकप्रिय भी हुई थी.
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लेखक ने इस किताब में 'वुहान-400' नामक एक वायरस का उल्लेख किया था, जिसे वुहान शहर के बाहर एक आरडीएनए प्रयोगशाला में बनाने की बात कही गई है. 'वुहान-400' नाम का ये जैविक हथियार 400 लोगों के माइक्रोगैनिज्म को मिलाकर बनाया गया था.
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किताब में यह भी कहा गया है कि 'वुहान 400' का असर सिर्फ इंसानों पर पड़ता है और इससे दूसरे जीवों को किसी तरह का खतरा नहीं है. दूसरा, 'वुहान 400' इंसान के शरीर के बाहर ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रह सकता.
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सोशल मीडिया पर कुछ ब्लॉगर्स कोरोना वायरस को फ्रांस के प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी से भी जोड़कर देख रहे हैं. ब्लॉगर्स ने दावा किया है कि फ्रांस में जन्मे भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने करीब 465 साल पहले ही कोरोना वायरस की भविष्यवाणी कर दी थी.
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ट्विटर पर मार्को मलाकारा नाम के एक यूजर ने लिखा, 'दुनियाभर में बाढ़, आग, और कोरोनोवायरस का कहर वही संकट है जिसकी 465 साल पहले नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी.
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वहीं एक अन्य यूजर ने स्पैनिश भाषा में ट्वीट करते हुए लिखा, '21वीं सदी में आने वाली महामारी ने कदम रख दिया है. ये नास्त्रेदमस की ही एक भविष्यवाणी थी. हम मौत के बेहद करीब हैं.'
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कई ऑनलाइन थियोरिस्ट्स का भी यही कहना है कि माइकल डी नास्त्रेदमस ने 15वीं शताब्दी में अपनी भविष्यवाणी में एक भयंकर महामारी के फैलने की आशंका जताई थी.
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नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां रहस्यमयी वाक्यों के रूप में मिलती हैं जिन्हें क्वाट्रेन्स (चौपाई) कहा जाता है. उनकी भविष्यवाणियां पहली बार 1555 में अस्तित्व में आई थीं.