फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने रूस की कोरोना वायरस की वैक्सीन पर भरोसा जताया है. फिलीपींस के राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की रूस की कोशिश की तारीफ की और ट्रायल में वॉलंटियर करने की भी इच्छा जताई. दुतेर्ते ने उम्मीद जताई है कि रूस उनके देश को मुफ्त में वैक्सीन की आपूर्ति करेगा.
रूस इस महीने कोविड-19 की वैक्सीन के लिए नियामक संस्थाओं से मंजूरी लेने की तैयारी कर रहा है और उसने अपनी वैक्सीन फिलीपींस को भी देने का वादा किया है. रूस फिलीपींस में किसी स्थानीय फर्म के साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन की भी योजना बना रहा है.
एशियाई देशों में कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले वाले देशों में फिलीपींस का भी नाम है. फिलीपींस में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. सोमवार को यहां कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या 136,638 पहुंच गई है. यहां एक दिन में कोरोना संक्रमण के 6958 नए मामले सामने आए हैं.
दुतेर्ते ने सोमवार को एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, "मैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बताना चाहता हूं कि मुझे कोरोना से लड़ाई में आपके शोध पर पूरा भरोसा है और मुझे यकीन है कि आपने जो वैक्सीन बनाई है, उससे मानवता का कल्याण होगा."
दुनिया भर में कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने को लेकर जबरदस्त होड़ चल रही है और ऐसे में ये चिंता भी जताई जा रही है कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और राजनीति की वजह से वैक्सीन की सुरक्षा से समझौता हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना वैक्सीन बनाने में जल्दबाजी को लेकर आगाह किया है. तमाम विश्लेषकों का कहना है कि वैक्सीन का उत्पादन करने से पहले सभी चरणों के ट्रायल को पूरा करना बेहद जरूरी है, तभी इसके प्रभाव और साइड इफेक्ट का पता चल पाएगा.
हालांकि, दुतेर्ते ने लोगों के डर को दूर करने के लिए वैक्सीन को खुद पर आजमाने की पेशकश कर दी. दुतेर्ते ने कहा, मैं वो पहला शख्स बन सकता हूं जिस पर रूस की वैक्सीन का परीक्षण किया जा सकता है.
दुतेर्ते के कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि फिलीपींस रूस के साथ वैक्सीन ट्रायल, सप्लाई और उत्पादन पर काम करने के लिए तैयार है. जुलाई महीने में दुतेर्ते ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी वैक्सीन बनने पर फिलीपींस को प्राथमिकता देने की अपील की थी.
कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित होने के साथ दुनिया के कई देशों को डर है
कि शायद उन तक वैक्सीन पहुंच ही ना पाए. ब्रिटेन, अमेरिका समेत तमाम विकसित
देश पहले से ही संभावित वैक्सीन की करोड़ों डोज अपने लिए सुरक्षित कर चुके
हैं.