इसके अलावा, कई लोगों में पहले से ही ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क होता है. इसमें बुढ़ापा, ज्यादा वजन, हाइपरटेंशन, डायबिटीज या ऐसी दवाएं लेना जिससे ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ जाता हो, जैसे फैक्टर शामिल हैं. स्वाइन फ्लू और सार्स जैसे वायरस भी ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ाते हैं.