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शरीर के साथ सिकुड़ रहा है इंसानी दिमाग

समय के साथ-साथ मानव शरीर में बदलाव हुए, लेकिन एक चौंकाने वाली खोज के मुताबिक मनुष्‍य का दिमाग अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा.

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समय के साथ-साथ मानव शरीर में बदलाव हुए, लेकिन एक चौंकाने वाली खोज के मुताबिक मनुष्‍य का दिमाग अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा. जी हां, फ्रांसीसी वैज्ञानिकों के एक दल ने लगभग 28,000 साल पुराने मानव की एक खोपड़ी का हवाला देते हुए यह दावा किया है कि मनुष्य का दिमाग सिकुड़ने लगा है.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक फ्रांस में पाये गये खोपड़ी के अवशेषों से जो प्रतिरूप तैयार किया गया है, वो आज के मानव की खोपड़ी से 20 फीसदी बड़ा है.

डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि डोडरेग्ने की एक गुफा से पाई गई इस खोपड़ी को क्रो मंगोन-1 नाम दिया गया है, जिसे पेरिस स्थित फ्रेंच नेशनल म्यूजियम ऑफ नेशनल हिस्ट्री में रखा गया है.

क्रो मंगोन-1 की खोपड़ी के एक शुरुआती मूल्यांकन में इस बात की पुष्टि की गई है कि मस्तिष्क छोटा हो रहा है, जो बड़े मस्तिष्क की बात करने वाले इससे पहले की धारणाओं के ठीक उलट है.

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