तथाकथित पयार्वरण अनुकूल एलईडी लाइटें आपकी आंखों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं. इस संबंध में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि लाइट एमिटिंग डायोड (एलईडी) लाइटें इंसान की आंखों के रेटिना को ऐसा नुकसान पहुंचा सकती हैं जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी.
एलईडी किरणों में लगातार रहने से यदि एक बार रेटिना की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच जाए तो उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता. थिंकस्पेन डाट काम ने यह खबर दी है.
कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी स्क्रीन और ट्रैफिक लाइटों के अंतत: एलईडी लाइटों में बदलने को देखते हुए आने वाले समय में एलईडी से होने वाले विकिरण के कारण विश्व स्तर पर आंखों की बीमारी एक महामारी का रूप ले सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि नीली रोशनी की चमक को कम करने के लिए उपकरणों में फिल्टर लगाए जाने की जरूरत है. मैड्रिड के कम्पल्यूटेंस यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डा. सेलिया सांचेज रामोस कहती हैं कि इंसानों की आंखें साल में करीब छह हजार घंटे खुली रहती हैं और अधिकतर समय वे कृत्रिम प्रकाश का सामना करती हैं. इसलिए रामोस कहती हैं कि इस नुकसान से बचने का सर्वश्रेष्ठ तरीका यही है कि दुष्प्रभाव को कम करने के लिए थोड़े थोड़े समय बाद अपनी आंखों को बंद करें.