डॉ. संजय बख्शी के फिजियोलाइन (ऐडवांस न्यूरोरिहैबिलिटेशन, ऑर्थोपेडिक रिहैबिलिटेशन, विशेषीकृत फिजियोथैरेपी और इंटरनेशनल थैरेपीज के लिये एक सेंटर) ने हैंड रिहैबिलिटेशन के लिए पहल की है. हैंड रिहैबिलिटेशन लकवाग्रस्त मरीजों के लिये पूर्ण रूप से चालित एक हाथ है, जिसे सेंटर ने पेश किया है और भारत में पहली बार रोबोटिक न्यूरोरिहैबिलिटेशन ग्लव (दस्ताने) ग्लोरिहा को लॉन्च किया है.
ग्लोरिहा हाथ के न्यूरोमोटर रिहैबिलिटेशन के लिए एक रोबोटिक उपचार उपकरण है. ग्लोरिहा का संकेत खासतौर से पेरिफेरल या सेंट्रल नर्वस सिस्टम अथवा मायलाइन लेशन्स के चोटिल होने के बाद हाथ के पैरेसिस या प्लेगिया के मामलों में होता है. उपचार के माध्यम से हाथ की मांसपेशियों को मस्तिष्क के माध्यम से प्रभावशाली तरीके से काम करने का संकेत देने के लिये उत्प्रेरित किया जाता है. रोबोट मरीजों के लिये 3डी एनिमेशन इंटरफेस के साथ ऑडियो-विजुअल फीडबैक प्रदान करते हैं. ग्लोरिहा उन मरीजों के लिये बेहद उपयोगी है, जो स्ट्रोक या किसी दुर्घटना के बाद अपनी ऊंगलियों को हरकत में लाने का प्रयास कर रहे हैं. उपचार के शुरूआती चरण में हाथ की स्पेस्टिसिटी को कम किया जा सकता है.
डॉ. संजय बख्शी ने बताया कि यह उपचार हाथों की अक्षमता के शिकार मरीजों के लिये उम्मीद की नई किरण बनेगा और न्यूरोरिहैबिलिटेशन के साथ ग्लोरिहा का उपयोग कर मरीजों में परिणाम की संभावना को भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रोक के बाद हैंड डिस्एबिलिटी से ग्रस्त मरीजों को अप्रैल महीने में निःशुल्क परामर्श देंगे और उनका उपचार करेंगे. पैरालिसस (लकवा) के उपचार में पिछले 15 साल से फिजियोलाइन अग्रदूत रहा है और इसने दुनिया भर के मरीजों का उपचार किया है, जो विभिन्न शारीरिक अपंगता के शिकार रहे हैं और जिनके अलग-अलग कार्यात्मक लक्ष्य रहे हैं.