फूलों तितलियों चिड़ियों और मछलियों की तरह अपने शरीर को इन्द्रधनुषी रंगों से सजाने की आदिम चाह का नाम है टैटू (गोदना) जो भारत सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्राचीन काल से प्रचलित है लेकिन आधुनिक जमाने ने इसकी रंगत काफी बदल दी है और यह शौक त्वचा की सेहत पर भारी पड़ सकता है.
टैटू को गोदना भी कहते हैं
देश के विभिन्न जनजातीय समुदायों और ग्रामीण इलाकों में टैटू को गोदना के नाम से जाना जाता है. नीले रंग की स्याही से बनाये जाने वाला गोदना समाज में कभी परंपरा और फैशन का हिस्सा था लेकिन आज यह पूरी तरह से टैटू के रूप में मात्र फैशन बन गया है. चिकित्सकों का मानना है कि टैटू बनाने में दूषित सूई और संदूषित स्याही के इस्तेमाल से टेटनस, हेपटाइटिस, टीबी और एड्स जैसे जानलेवा संक्रमण हो सकते हैं.
टैटू है संक्रमण का घर
एम्स के त्वचा रोग विभाग के डॉक्टर विनोद खेतान ने बताया कि टैटू बनाने में एक ही सुई के बार बार उपयोग करने से कुष्ठरोग, हेपटाइटिस, एचआईवी जैसे रक्तजनित संक्रमण होने की संभावना रहती है. इसलिए टैटू हमेशा किसी अधिकृत केंद्र से बनवाना चाहिए. छत्तीसगढ़ के चिकित्सक अशोक घोरपड़े ने अपने अध्ययन में छत्तीसगढ़ में टैटू के कारण कुष्ठरोग के कई मामले पाये थे. राज्य के लोगों में हाटों में जाकर टैटू बनाने का प्रचलन है.
एलर्जी वाले नहीं बनवाएं टैटू
अपोलो अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सचिन ने बताया कि युवा पीढ़ी में टैटू ने एक फैशन का रूप धारण कर लिया है लेकिन इसे बनवाते समय लोगों को खास एहतियात बरतना चाहिए. यदि उनकी त्वचा एलर्जी वाली है तो उन्हें टैटू बनवाने से बचना चाहिए. उन्होंने बताया कि टैटू बनवाने के लिये हमेशा ही नई सूई का इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिये. इस बात का भी खास ख्याल रखा जाना चाहिये कि इसमें इस्तेमाल होने वाले रंगों से कहीं आपकी त्वचा को एलर्जी तो नहीं है.
फैशन में टैटू
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के कार्यकारी सदस्य डॉक्टर अनिल बंसल ने बताया युवाओं के बीच फैशन के रूप में टैटू का चलन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन हमारे देश में टैटू बनाने के पेशे से अप्रशिक्षित लोग भी जुड़े हुये हैं. उन्होंने बताया कि ये लोग इसके तरीके और सावधानियों से अवगत नहीं हैं और इससे हेपटाइटिस और एड्स जैसी रक्तजनित जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं.
अमेरिका में टैटूधारी नहीं कर सकते रक्तदान
अमेरिका में रेड क्रॉस ने अधिकृत स्टूडियो में टैटू नहीं बनवाने वाले लोगों पर 12 महीने तक रक्तदान करने से रोक लगा रखी है. वहीं ब्रिटेन में ऐसे लोगों पर छह महीने तक रक्तदान करने पर रोक है. पिछले साल अमेरिका में कराये गये एक ऑनलाइन सर्वेक्षण के मुताबिक वहां लगभग 14 प्रतिशत वयस्क लोगों ने अपने शरीर पर टैटू बनवा रखा है. दिलचस्प तथ्य यह है कि वहां समलैंगिक पुरूष और महिलाओं में ऐसे मामले अधिकतर पाये गये. जबकि 25 साल से 29 साल की आयु के 32 प्रतिशत लोगों ने टैटू बनवाया था.
अपोजिट सेक्स को आकर्षित करता है टैटू
प्रगैतिहासिक काल से ही टैटू का विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों में इस्तेमाल किया जाता रहा है. खास स्थानों में प्रवेश, किसी खास पद को दर्शाने, धार्मिक और आध्यात्मिक समर्पण के प्रतीक के तौर पर भी शरीर के खास हिस्सों पर टैटू गोदवाने का प्रचलन था. इसे बहादुरी और विपरीत लिंग को आकर्षित करने लिये भी अपनाया गया. प्राचीन मिस्र की ममियों में भी टैटू पाये गये हैं जो ईसा पूर्व लगभग दो हजार साल के अंतिम समय के हैं.