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सांची अपने बौद्ध स्मारकों के लिए लोकप्रिय है

सांची मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गांव हैं जो रायसेन जिले में स्थित है. अपने स्तूपों के लिए प्रसिद्ध सांची में कई बौद्ध स्मारक मौजूद हैं. ईसा पूर्व तीसरी सदी से बारहवीं सदी के दौरान बने स्तूप, मठों, मंदिरों और स्तंभों के लिए जाना जाता है.

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सांची का प्रसिद्ध स्तूप
सांची का प्रसिद्ध स्तूप

सांची मध्यप्रदेश का एक छोटा सा गांव हैं जो रायसेन जिले में स्थित है. अपने स्तूपों के लिए प्रसिद्ध सांची में कई बौद्ध स्मारक मौजूद हैं. ईसा पूर्व तीसरी सदी से बारहवीं सदी के दौरान बने स्तूप, मठों, मंदिरों और स्तंभों के लिए जाना जाता है. यह बौद्धों का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. ये स्तूप तोरणों से घिरे हैं जिनमें से प्रत्येक प्यार, शांति, विश्वास और साहस का परिचायक है. स्तूप के द्वार की मेहराब पर भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र खुदा हुआ है. यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर में शामिल किया है.

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अगर आप सड़क या रेलगाड़ी से जा रहे हैं तो आपको पांच किलोमीटर दूर से ही सांची का स्तूप नजर आने लगेगा. ज्यों-ज्यों आप इस विशाल, शानदार स्तूप के पास पहुंचेंगे आप अलग ही एहसास से ओत-प्रोत होने लगेंगे. पहाड़ की चोटी पर स्थित यह स्तूप आपको आध्यात्मिक एहसास से लबरेज कर देगा. स्तूप नंबर वन यानि ग्रेट स्तूप के अलावा इस इलाके में कई और स्तूप, मठ, मंदिर और बेहद प्रसिद्ध अशोक की लाट भी है, ये सभी कुछ यहां तीन ईसा पूर्व से 12वीं शताब्दी के बीच यानी 1,400 सालों के दौरान बनाया गया है. महान स्तूप को मौर्य शासक अशोक ने बनवाया तो फिर शुंग शासक पुष्यमित्र ने यहां सीढ़ियां और जंगले बनाकर इसे फैलाव दिया. यह 36.5 मीटर व्यास का गोलाकार गुंबद तिहरे छाते से घिरा है, जो बुद्ध, धर्म और संघ के तीन गहनों को प्रदर्शित करता है. सांची का म्यूजियम इस परिसर में नीचे की ओर है, जहां कई कलाकृतियां मौजूद हैं. जिसमें सिंहों वाली अशोक की लाट और ब्राह्मणवादी पट्टियां जिन पर विष्णु, गणेश और देवी महिषासुर मर्दिनी को दिखाया गया है.

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क्या देखें
यहां मौजूद 'ग्रेट स्तूप' भारत में मौजूद सबसे पुरानी शिला संरचना है जिसे सम्राट अशोक ने ईसा पूर्व तीसरी सदी में स्थापित किया था.

सांची में कुल 36 मठ, 18 मंदिर, एक स्तूप के साथ ही 1 अशोक स्तंभ मौजूद हैं. हालांकि जब 1854 में पुरातात्विक विभाग ने यहां खुदाई की तो ग्रेट स्तूप के अलावा यहां तीन और स्तूप, अशोक स्तंभ, मौर्यकालीन मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर इत्यादि मिले थे.

कैसे पहुंचें
हवाई मार्गः करीबी एयरपोर्ट भोपाल.
रेल मार्गः करीबी प्रमुख रेलवे स्टेशन भोपाल में भी है, जो सभी प्रमुख शहरों के साथ रेल संपर्क से जुड़ा है.
सड़क मार्गः यह विश्व प्रसिद्ध स्मारक राज्य की राजधानी भोपाल से सड़क मार्ग से सिर्फ 45 किमी दूर है. जबकि बेसनगर और विदिशा से इसकी दूरी 10 किलोमीटर है. यह कोटगढ़, भोपाल, विदिशा और इंदौर से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है.
कब जाएं
अगर आप यहां घूमने जाने का मन बना रहे हैं तो यह जान लें कि यह लोगों के के लिए सुबह 8 बजे से 5 बजे तक खोला जाता है. आम लोगों को यहां घूमने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है. यहां फोटोग्राफी करने की अनुमति है, साथ ही यहां गाईड भी मौजूद हैं.

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